देश को दाल उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने के लिए सरकार के जरिए उठाए गए कदमों का असर दिखने लगा है। दाल की उत्पादन लगातार रिकार्ड स्तर पर है। इसे ध्यान में रखते हुए सरकार ने दलहनों के निर्यात पर लगी रोक को हटाने का निर्णय लिया है।
ताकि किसानों को वाजिब दाम मिल सके। गुरूवार को पीएम मोदी की अध्यक्षता में संपन्न हुई मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति की बैठक में दलहनों के निर्यात पर लगाए गए प्रतिबंधों को हटाने का निर्णय लिया गया।
सरकार का कहना है कि किसानों को लाभकारी मूल्य और उन्हें व्यापक बाजार उपलब्ध कराने के लिए यह कदम उठाया गया है। लेकिन कहीं न कहीं सरकार के जरिए दाल उत्पादन के लिए उठाए गए कदमों का भी इसे असर माना जा रहा है। भारत को देश में दाल की मांग पूरा करने के लिए आयात पर निर्भर रहना पड़ता था। मगर अब स्थिति ये हो गई है कि सरकार को निर्यात के कदम उठाने पड़ रहे हैं।
देश में बढ़ा है दाल का उत्पादन
देश में दाल का उत्पादन बढा है। भारतीय किसानों ने दलहन पर देश की आत्म निर्भरता सुनिश्चित करने के लिए उत्पादन बढ़ाया है। वर्ष 2016—17 में दलहन का उत्पादन 22.95 मिलियन टन रहा।
तो कृृषि मंत्रालय के अधिकारियों का आंकलन है कि इस दफे भी दल का उत्पादन करीब 23 मिलियन टन ही रहने की उम्मीद है। खरीफ सीजन के पहले अनुमान में ही 8.71 मिलियन टन दाल उत्पादन का अनुमान है।
मिशन मोड़ में कृृषि मंत्रालय ने चलाया अभियान
देश में दलहन उत्पादन बढ़ाने के लिए किसानों के साथ देश की सरकार का भी बड़ा योगदान है। पीएम मोदी के केंद्र की सत्ता संभालने के चंद माह बाद ही देश में दाल का संकट बढ़ गया था।
बल्कि बिहार विधानसभा चुनाव में दाल की कीमत चुनावी मुद्दा बन गया था। भाजपा की पराजय में इसे बड़ा योगदान माना गया। बिहार के बाद सियासी सबक लेते हुए केंद्र के कृृषि मंत्रालय ने दलहन मिशन की शुरूआत की।
इसके तहत मिशन मोड़ में दाल उत्पादन के लिए किसानों को प्रेरित करने के साथ उन्हें सुविधा प्रदान करने का फैसला हुआ। सरकार ने दालों के न्यून्तम समर्थन मूल्य में भारी इजाफा करते हुए अतिरिक्त बोनस का भी प्रावधान किया।
इसके अलावा कई ईलाकों में अधिक पैदावार वाले बीजों सरकार की ओर से किसानों को मुफ्त में मुहैया कराए गए। कृृषि मंत्री राधा मोहन सिंह ने सीधी रूचि दिखाते हुए किसानों के बीच कई जगह खुद जाकर बीजों का वितरण किया।
सूखा प्रभावित इलाकों में दाल के बीज की ऐसी किश्में किसानों को प्रदान की गई जिनका कम पानी में बेहत्तर उत्पादन क्षमता हो। दहलन उत्पादन को बरकरार रखने के लिए सरकार ने न्यूनतम समर्थन कीमत या बाजार दर जो भी अधिक हो, को सुनिश्चित करके सीधे किसानों से 20 लाख टन दहलन खरीदी हैं। जोकि दलहन की खरीद में अब तक का सर्वाधिक रिकार्ड है।