सरकार ने कोरोना वायरस बीमारी के खिलाफ टीका विकसित करने की पहल को अपना सहयोग देने के लिए पीएम-केयर्स (प्रधानमंत्री नागरिक सहायता और आपातकालीन स्थिति में राहत) फंड से 100 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं। जैव प्रौद्योगिकी विभाग के अनुसार शैक्षणिक संस्थानों, उद्योग और स्टार्ट-अप्स के तहत भारत में 25 टीकों के विकास पर काम चल रहा है।
आवंटित राशि का उपयोग प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार के विजयराघवन की देखरेख में किया जाएगा। जैव प्रौद्योगिकी विभाग की सचिव डॉक्टर रेणु स्वरूप ने कहा, 'पीएम केयर्स फंड से 100 करोड़ रुपये का आवंटन कल ही घोषित किया गया है। हम अगले कुछ दिनों के अंदर इसका उपयोग करने के बारे में एक रूपरेखा तैयार करेंगे। लेकिन निश्चित रूप से सहायता पूरी तरह से स्वदेशी टीका बनाने वाले उम्मीदवार को दी जाएगी।'
कम से कम 10 टीका परियोजनाओं को डीबीटी-बीआईआरएसी (जैव प्रौद्योगिकी उद्योग अनुसंधान सहायता परिषद) संघ के तहत मौद्रिक और नियामक के तौर पर सहायता मिल रही है। हालांकि यह साफ नहीं है कि ये परियोजनाएं पीएम-केयर्स के पैसे के लिए योग्य होंगी या नहीं।
डॉक्टर स्वरूप ने कहा, 'इन परियोजनाओं को पहले से ही बीआईआरएसी का समर्थन मिल रहा है, इसके अलावा यह कहना जल्दबाजी होगी कि यह धनराशि उनमें से किसी को दी जाएगी या नहीं। उनमें से ज्यादातर परियोजनाएं अंतरराष्ट्रीय भागीदारी वाली हैं। इन 10 उम्मीदवारों के अलावा, विभिन्न अनुसंधान समूहों से लगभग पंद्रह अन्य उम्मीदवार हैं। ये सभी विकास के विभिन्न चरणों में हैं और वर्तमान में समिति द्वारा इसका मूल्यांकन किया जा रहा है कि कौन ज्यादा प्रासंगिक है।'
अभी तक डीबीटी-बीआईआरएसी ने 70 परियोजनाओं को अपनी सहायता दी है। यह रोलिंग आधार पर आवेदन स्वीकार करता है। इन 70 प्रस्तावों में से 10 टीके के उम्मीदवार हैं, 34 विकास या स्केल-अप के लिए निदान, 10 चिकित्सा विकल्प हैं, दो ड्रग रिप्रपोसिंग प्रस्ताव हैं और 14 निवारक हस्तक्षेप हैं।