11 जनवरी को केंद्रीय कैबिनेट ने पीएम नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में जैविक कृषि उत्पादों को बेचने के लिए राष्ट्रीय स्तर के कोऑपरेटिव समिति के गठन को मंजूरी दी है। इसमें अलग-अलग मंत्रालयों का सहयोग होगा।
जैविक कृषि उत्पादों को किसान यदि अपने स्तर से बेचने का प्रयास करें तो उन्हें पर्याप्त लाभ नहीं होता है इसलिए सरकार का मानना है कि सहकारी समितियों के जरिये इन्हें बेचना ज्यादा फायदेमंद होगा। केंद्रीय कृषि सचिव गणेश कुमार ने सोमवार को यह जानकारी दी।
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उन्होंने बताया कि 11 जनवरी को केंद्रीय कैबिनेट ने पीएम नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में जैविक कृषि उत्पादों को बेचने के लिए राष्ट्रीय स्तर के कोऑपरेटिव समिति के गठन को मंजूरी दी है। इसमें अलग-अलग मंत्रालयों का सहयोग होगा। कुमार ने बताया, हमारे पास बाजार है, हमारे पास ग्राहकों की मांग है और यदि आप सीधे किसानों को लाभ पहुंचाना चाहते हैं तो सहकारिता की भूमिका महत्वपूर्ण है। उन्होंने यह बातें इस विषय से संबंधित हितधारकों के साथ बैठक में कही।
उन्होंने सामान्य और जैविक गेहूं के दाम में अंतर का जिक्र करते हुए कहा, यह अंतर 20 से 25 रुपये प्रति किलो का है। ऐसे में किसानों को अतिरिक्त कमाई करवाने में सहकारिता की खास भूमिका सामने आती है। सरकार ने जिस राष्ट्रीय समिति के गठन को मंजूरी दी है वह जैविक खेती के विभिन्न पहलुओं पर ध्यान केंद्रित करेगी।
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इसमें जैविक उत्पादों के प्रमाणीकरण, भारत और विदेश में मांग और खपत की क्षमता को बढ़ाना, ब्रांडिंग आदि शामिल हैं। इस सहकारी समिति का नाम नेशनल कोऑपरेटिव ऑर्गेनिक लि. होगा और इसके 5 प्रवर्तक होंगे। गुजरात कोऑपरेटिव मिल्क मार्केटिंग फेडरेशन (अमूल), नैफेड, एनसीसीएफ, एनडीडीबी और एनसीडीसी मिलकर इस जैविक सहकारी समिति को आरंभ करेंगे।