पश्चिम एशिया में तनाव के बीच देश में एलपीजी संकट की आशंका को लेकर सरकार ने बड़ा भरोसा दिया है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने साफ कहा है कि देश में एलपीजी, पेट्रोल और डीजल की कोई कमी नहीं है। इसी बीच कालाबाजारी करने वालों पर सख्त कार्रवाई करते हुए 55 गैस एजेंसियों को निलंबित कर दिया गया है। सरकार ने लोगों से पैनिक बुकिंग न करने की अपील भी की है।
सरकार ने बताया कि ईंधन की सप्लाई पूरी तरह सामान्य है और वितरण व्यवस्था पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है। देशभर में 3400 से ज्यादा जगहों पर छापेमारी कर 214 एजेंसियों पर जुर्माना लगाया गया है। मंत्रालय ने चेतावनी दी है कि ओवरचार्जिंग और जमाखोरी बिल्कुल बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
क्या कालाबाजारी पर सरकार ने बड़ा शिकंजा कसा?
सरकार ने कालाबाजारी रोकने के लिए देशव्यापी अभियान चलाया। 10 अप्रैल को बड़े स्तर पर छापेमारी की गई। इस दौरान कई एजेंसियों में अनियमितताएं पाई गईं। 214 एजेंसियों पर भारी जुर्माना लगाया गया और 55 एजेंसियों की डिस्ट्रीब्यूटरशिप तुरंत प्रभाव से रद्द कर दी गई। यह कार्रवाई बाजार में पारदर्शिता लाने के लिए अहम मानी जा रही है।
क्या होर्मुज से सुरक्षित निकला एलपीजी जहाज राहत देगा?
इस बीच 20,400 मीट्रिक टन एलपीजी लेकर आने वाला भारतीय जहाज जग विक्रम होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित निकल चुका है। इसके 15 अप्रैल तक मुंबई पहुंचने की संभावना है। सरकार ने यह भी बताया कि होर्मुज क्षेत्र में मौजूद अन्य 20 भारतीय जहाजों की सुरक्षा पर लगातार नजर रखी जा रही है।
प्रवासी और आम लोगों को क्या राहत मिली?
सरकार ने प्रवासी मजदूरों और छात्रों के लिए 5 किलो वाले एलपीजी सिलेंडरों की उपलब्धता दोगुनी कर दी है। 23 मार्च से अब तक 12 लाख सिलेंडर बेचे जा चुके हैं। इससे छोटे उपभोक्ताओं को राहत मिली है और गैस की उपलब्धता बेहतर हुई है।
क्या सप्लाई और डिलीवरी सिस्टम मजबूत हुआ है?
मंत्रालय के मुताबिक एक दिन में 51.5 लाख से ज्यादा एलपीजी सिलेंडर की डिलीवरी की गई। 98 प्रतिशत उपभोक्ता अब डिजिटल माध्यम से बुकिंग कर रहे हैं। साथ ही उर्वरक संयंत्रों को गैस सप्लाई 5 प्रतिशत बढ़ाई गई है और पीएनजी-सीएनजी उपभोक्ताओं को 100 प्रतिशत आपूर्ति दी जा रही है।
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