2016-17 वित्त वर्ष के लिए सरकार की कर वसूली अनुमानित लक्ष्य से बढ़कर 17.10 लाख करोड़ रुपये हो गई है। 1 फरवरी को पेश हुए बजट में उपलब्ध कराए गए संशोधित अनुमान में कर वसूली 16.97 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान जताया गया था। वित्त मंत्रालय ने बयान में कहा कि 17.10 लाख करोड़ रुपये की कर वसूली वित्त वर्ष 2015-16 में हुई कर वसूली की तुलना में लगभग 18 फीसदी अधिक है। राजस्व सचिव हसमुख अढिया ने कहा कि यह कर वसूली पिछले 6 सालों में सर्वाधिक है।
प्रत्यक्ष कर वसूली में 14.2 फीसदी का इजाफा
अप्रैल-मार्च अवधि में प्रत्यक्ष कर वसूली वित्त वर्ष 2015-16 में हुई वसूली से 14.2 फीसदी बढ़कर 8.47 लाख करोड़ रुपये हो गई। कुल प्रत्यक्ष कर वसूली 2016-17 के लिए प्रत्यक्ष कर वसूली के संशोधित अनुमान को 100 फीसदी हासिल किया जाना दर्शाती है। प्रत्यक्ष कर वसूली के लिए संशोधित अनुमान 8.47 लाख करोड़ रुपये का ही था।
अप्रैल-मार्च अवधि में 1.62 लाख करोड़ रुपये के रिफंड हुए जारी
कुल राजस्व वसूली में कारपोरेट कर वसूली में 13.1 फीसदी की बढ़ोत्तरी हुई, जबकि व्यक्तिगत आयकर वसूली 18.4 फीसदी बढ़ी। हालांकि रिफंड के लिए समायोजन करने के बाद कारपोरेट कर वसूली में कुल वृद्धि 6.7 फीसदी रही, जबकि व्यक्तिगत आयकर वसूली में 21 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई। बयान में कहा गया कि अप्रैल 2016 से मार्च 2017 के दौरान 1.62 लाख करोड़ रुपये के रिफंड जारी किए गए। यह आंकड़ा वित्त वर्ष 2015-16 के दौरान जारी रिफंडों से 32.6 फीसदी ज्यादा है।
22 फीसदी बढ़ी अप्रत्यक्ष कर वसूली
वित्त वर्ष 2016-17 में अप्रत्यक्ष कर वसूली 2015-16 वित्त वर्ष के मुकाबले 22 फीसदी बढ़कर 8.63 लाख करोड़ रुपये हो गई। मार्च 2017 तक की अप्रत्यक्ष कर वसूली 2016-17 वित्त वर्ष के लिए अप्रत्यक्ष कर वसूली के संशोधित अनुमान का 101.35 फीसदी है। अप्रत्यक्ष कर वसूली के लिए संशोधित अनुमान 8.5 लाख करोड़ रुपये का था। 2016-17 के दौरान केंद्रीय उत्पाद शुल्क वसूली 33.9 फीसदी बढ़कर 3.83 लाख करोड़ रुपये रही। वित्त वर्ष 2015-16 में यह वसूली 2.86 लाख करोड़ रुपये थी। वित्त वर्ष 2016-17 में कुल सेवा कर वसूली इससे पहले के वित्त वर्ष की 2.11 लाख करोड़ रुपये वसूली से 20.2 फीसदी बढ़कर 2.54 लाख करोड़ रुपये रही। सीमा शुल्क वसूली 2016-17 वित्त वर्ष में 2.26 लाख करोड़ रुपये रही, जो वित्त वर्ष 2015-16 में हुई 2.10 लाख करोड़ रुपये की वसूली से 7.4 फीसदी ज्यादा है।