मोदी सरकार सेना को और पावर देने की बात कही है। अफस्पा (सशस्त्र बल सुरक्षा कानून) वाले क्षेत्रों में सरकार सेना को और ताकत देने की वकालत की है। सरकार ने इस बात की दलील बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में दी है। गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने अफस्पा के अंतर्गत सुरक्षा बलों को दी जाने वाली विशेष सुरक्षा अधिकारों को निरस्त कर दिया था। सरकार इसी आदेश के विरोध में कहा कि अगर सेना की ताकत घटाई गई तो यहां अशांति फैल जाएगा।
सुनवाई के दौरान सरकार ने कहा, 'अगर सुप्रीम कोर्ट के उक्त आदेश को जारी रखा गया तो एक दिन अशांति वाले क्षेत्रों में शांति और कानून-व्यवस्था बनाए रखना असंभव हो जाएगा।' अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने कहा, 'भारतीय सेना को परिस्थितियों के अनुसार त्वरित निर्णय लेने की शक्तियां देनी ही होंगी। उन शक्तियों के आधार पर लिए गए फैसले को एक सामान्य मौत के बाद की जाने वाली पड़ताल की तरह ही नहीं की जा सकती है।'
इस पर चीफ जस्टिस जे. एस. खेहर की अध्यक्षता वाले बेंच ने कहा, 'आप ऐसा नहीं कर सकते हैं कि इस क्यूरेटिव पिटिशन पर कोर्ट दुबारा मेरिट के आधार सुनवाई करे।' कोर्ट के इस संभावित तर्क को समझते हुए अटॉर्नी जनरल ने जोर देकर कहा कि यह बहुत गंभीर मामले से जुड़ी याचिका है। रोहतगी ने कहा, 'महज सुरक्षा बलों के लिए ही यह महत्वपूर्ण याचिका नहीं है। एनकाउंटर और आतंकियों से मुकाबले में सुरक्षा बल के जवान हर बार अपनी जान खतरे में डालते हैं। सिर्फ सुरक्षा बलों के लिए नहीं देश की संप्रभुता और अखंडता के लिहाज से भी यह बेहदज महत्वपूर्ण याचिका है।'