श्रीलंका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति गोतबाया राजपक्षे का कहना है कि वह श्रीलंका को एक तटस्थ देश के तौर पर देखना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि वह भारत के साथ मिलकर काम करना चाहते हैं। इसी वजह से वह ऐसा कुछ भी नहीं करेंगे जिससे कि किसी के हित को नुकसान पहुंचे। उन्होंने साफ कहा कि वह भारत-चीन के बीच चल रहे शक्ति संघर्ष के बीच में नहीं आना चाहते हैं। इसी महीने हुए राष्ट्रपति चुनाव में गोतबाया ने जीत हासिल की है। 18 सितंबर को उन्होंने श्रीलंका के राष्ट्रपति के तौर पर शपथ ली थी। वह 29 नवंबर को अपनी पहली आधिकारिक यात्रा के तौर पर भारत आने वाले हैं।
श्रीलंका के राष्ट्रपति गोताबाया राजपक्षे का कहना है कि हंबनटोटा बंदरगाह को 99 सालों के लिए चीन को लीज पर देना पिछली सरकार की गलती थी। इस समझौते को लेकर दोबारा बातचीत हो रही है। उन्होंने कहा कि निवेश के लिए कर्ज का छोटा हिस्सा देना एक अलग बात है, लेकिन रणनीतिक तौर पर महत्वपूर्ण आर्थिक बंदरगाह को पूरी तरह से दे देना गलत है। बता दें कि जब श्रीलंका चीन के कर्ज को नहीं चुका पाया तो 2017 में उसने हंबनटोटा बंदरगाह को अपने अधिकार में ले लिया था।