बॉम्बे हाई कोर्ट ने बिन ब्याही मां की याचिका पर बीएमसी को आदेश दे नया सर्टिफिकेट जारी करने को कहा। कोर्ट ने निर्देश दिया याचिकाकर्ता अविवाहित महिला की बेटी के बर्थ सर्टिफिकेट से पिता के नाम को हटाया जाए। महिला ने अदालत से अपनी बेटी के बर्थ सर्टिफिकेट से उसके जैविक पिता का नाम हटाने की याचिका दाखिल की थी।
जस्टिस एएस ओका और जस्टिस आरआई चागला की पीठ ने बृहनमुंबई नगर निगम (बीएमसी) को निर्देश दिया कि वह नया बर्थ
सर्टिफिकेट जारी करे। जिसमें बच्ची के जैविक पिता के नाम का स्थान खाली हो। हालांकि पीठ ने महिला की उस प्रार्थना को मानने से इनकार कर दिया जिसमें कहा गया था की बीएमसी के सभी रिकॉर्ड से पिता का नाम हटाया जाए।
याचिका में कहा गया था महिला ने बिना शादी के नवंबर 2013 में बच्ची को जन्म दिया था। वह कभी बीएमसी को बच्ची के पिता का नाम नहीं बताना चाहती थी। महिला ने कहा उसे इस बात की जानकारी नहीं है कि फॉर्म भरते समय किसने इस जानकारी का खुलासा किया। इम मामले में अदालत ने बच्ची के जैविक पिता को अदालत में बुलाया था।
उसने कहा कि उसे बर्थ सर्टिफिकेट से अपना नाम हटाए जाने पर कोई आपत्ति नहीं है। इससे पहले
सुप्रीम कोर्ट ने साल 2015 के ऐतिहासिक फैसले में कहा था कि सिंगल मदर को उसके बच्चे के जैविक पिता का नाम बताने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता है।