चिंतक चिन्मय मिश्र ने बच्चों के साथ जाने अनजाने में समाज की ओर से किए जा रहे अत्याचारों पर विस्तारपूर्वक प्रकाश डाला। भविष्य के डॉक्टर भी इन बच्चों में हैं। उन्होंने सनसनीखेज तथ्य बताया कि मध्य प्रदेश के पांचों निजी मेडिकल कालेजों के कर्ता धर्ता जेल में हैं। चिंतक पत्रकार रजनी बख्शी ने अपने ढंग से गांधीवाद की व्याख्या की। भाई गिरीश उपाध्याय ने कहा कि वास्तव में आज विमर्श का विषय गांधी विचार या व्यवहार होना चाहिए। साथी डॉक्टर राकेश पाठक ने सोशल मीडिया पर झूठ की बखिया उधेड़ दी। चंद्रकांत नायडू जी ने कहा कि हमारे सबके अंदर एक गांधी है। सेवाग्राम आते हैं तो वो जिंदा हो जाता है और माथापच्ची करके यहां से लौटते हैं तो वह गांधी सो जाता है। कुछ कुछ श्मशान वैराग्य जैसा भाव। मैंने भी अपनी बात रखी। जतिन देसाई, राकेश दीक्षित, अजीत जी और सोपान जोशी ने भी गांधी की पत्रकारिता के प्रसंग याद किए।
इसके बाद का सत्र धड़क रहा था। नौजवान साथियों के मंच पर आते ही सेमिनार धड़कने लगा। लगा, अब तक इसी की कमी थी। पीयुष बबेले, भूपेंद्र सिंह, स्वतंत्र, पाठक जी मिश्र, दयाशंकर मिश्र, पशुपति शर्मा और इनके जवान साथियों ने मंच लूट लिया। सत्र के बाद तृप्ति हुई। डकार आ गई। अब सिर्फ पी साईंनाथ को सुनने की इच्छा थी जो कल है। इसलिए एक बार फिर भोजनशाला में डिनर और यात्रिनिवास में खुले आसमान के नीचे गीत, गजल और अन्य विधाओं की महफिल। यकीनन आज नींद अच्छी आने वाली थी।