गौरतलब है कि पिछले माह ही
आरबीआई ने भारत में ऑपरेट कर रहीं सभी पेमेंट कंपनियों से 6 माह के भीतर देश में डाटा स्टोरेज की सुविधा देने के लिए कहा था। अपने नोटिफिकेशन में आरबीआई ने कहा था कि ऐसे वक्त में जब भारत में पेमेंट इकोसिस्टम डेवलप हो रहा है, तो नेटवर्क की बेहतर निगरानी के लिए ट्रांजेक्शन डाटा पर 'पर्यवेक्षी पहुंच' बनाने की जरूरत है।
आरबीआई की इस डेडलाइन का कई कंपनियों ने यह कहते हुए विरोध किया था कि इसे लागू करने के लिए दिया गया वक्त बेहद कम है और इससे उनका वैश्विक ग्लोबल नेटवर्क बाधित होगा। आनंदन ने बताया कि कंपनी ने सितंबर 2017 में मुंबई में अपना लोकल डाटा सेंटर स्थापित किया था। उन्होंने कहा कि आज ग्लोबल इंटरनेट का युग है और गूगल का आर्किटेक्चर ग्लोबल होने से डाटा पूरी दुनिया में फ्लो होता है।
आनंदन के मुताबिक डाटा को स्थानीय स्तर पर संग्रहित करने और आर्किटेक्चर के बुनियादी ढांचे में बदलाव के लिए बहुत बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर और नेटवर्क की आवश्यकता होगी और यह इतना आसान नहीं है। लेकिन हमारी सोच बहुत आसान है और भारतीय ग्राहकों के लिए लिए हमें सही उत्तर के साथ खुद को केन्द्रित करना होगा।