वर्ष 1904 में जब रूस-जापानी युद्ध शुरू हुआ, तो डॉ. गेड्रोइट्स ने रेड क्रॉस अस्पताल ट्रेन में एक सर्जन के रूप में अपनी स्वेच्छा से सेवाएं दीं। दुश्मन के खतरों के बीच डॉ. गेड्रोइट्स ने परिवर्तित रेलवे कार में स्थापित नीति के खिलाफ पेट की सर्जरी की, जिसमें वो सफल हुईं। अभूतपूर्व सफलता के साथ की गई ऑपरेशन के बाद रूसी सरकार ने उसे नए मानक के रूप अपनाया और जिससे युद्ध के मैदान की दवा के तरीके में बदलाव आया। युद्धक्षेत्र में सेवा देने के बाद गेड्रोइट्स ने रूसी शाही परिवार के लिए एक सर्जन के रूप में काम किया। 1929 में गेड्रोइट्स कीव विश्वविद्यालय में सर्जरी के प्रोफेसर के तौर पर नियुक्त हुईं।
इन सुधारों के लिए की थी पहल
डॉ. वेरा गेड्रोइट्स ने एक युवा चिकित्सक के तौर पर गेड्रोइट्स हाइजीन, पोषण और स्वच्छता को लेकर चिंतित थीं और स्थितियों में सुधार करने के लिए सिफारिशें कीं।
अपनी जिंदगी पर लिखी किताब
डॉ. वेरा सर्जन और मेडिकल प्रोफेसर के तौर पर सेवाएं देने के अलावा कई चिकित्सा रिसर्च भी कीं। वेरा गेड्रोइट्स की एक लेखक के रूप में उनकी प्रतिभा शिक्षाविदों तक सीमित नहीं थी। डॉ. गेड्रोइट्स ने 1931 के संस्मरण सहित कई कविताओं के कई संग्रह प्रकाशित किए हैं, जिसमें उनकी 1931 में आई अपनी बॉयोग्राफी ''लाइफ'' भी शामिल है। इस किताब में उन्होंने अपनी व्यक्तिगत यात्रा की कहानी को बताया है।