राजस्थान की राजधानी जयपुर स्थित में लेफ्टिनेंट जनरल मनजिंदर सिंह, आर्मी कमांडर, सप्त शक्ति कमान और बरिंदर जीत कौर रीजनल प्रेजिडेंट आवा, सप्त शक्ति कमान ने हाल ही में जयपुर के सैन्य स्टेशन में सप्त शक्ति कैंटीन का उद्घाटन किया। इस दौरान पूर्व सैनिक और उनके परिवारों के साथ सेवारत सैनिकों ने भी हिस्सा लिया।
10000 वर्ग फीट क्षेत्र में फैली यह अत्याधुनिक सीएसडी कैंटीन, एक डबल स्टोरी बिल्डिंग में स्थित है। इसमे कई स्वचालित बिलिंग काउंटर और विभिन्न श्रेणियों के स्टोर के लिए आकर्षक विशेष खंड हैं। कैंटीन में 4000 से अधिक वस्तुओं की सूची होगी। इसका उद्देश्य सेवारत सैनिकों, परिवारों और पूर्व सैनिकों को एक आरामदायक और संतोषजनक खरीदारी का अनुभव प्रदान करना है।
इस कैंटिन को पूर्व सैनिक और सेवारत सैनिकों की निर्भरता को ध्यान में रखते हुए डिजाइन और विकसित किया गया है। सेवारत सैनिकों, पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार और कल्याण के लिए जयपुर मिलिट्री स्टेशन में ट्रांजिट सुविधा और वेलनेस सेंटर जैसी कुछ और अन्य कल्याणकारी पहलों के साथ इस सुविधा का निर्माण किया गया है। यह प्रयास तीनों सेनाओं के भूतपूर्व सैनिकों, वीर नारियों, सेवारत सैनिकों और परिवारों के समग्र विकास और कल्याण की दिशा में सप्त शक्ति कमान की एक और बड़ी पहल है।
ज्ञान शक्ति थिंक टैंक ने बांग्लादेश पर आयोजित किया सेमिनार
गुरुवार को सप्त शक्ति कमांड के ज्ञान शक्ति थिंक टैंक ने बांग्लादेश पर एक सेमिनार आयोजित किया। इसमें क्षेत्रीय सुरक्षा की उभरती गतिशीलता और रणनीतिक साझेदारियों पर चर्चा करने के लिए विशेषज्ञों को एकत्र किया गया। इस सेमिनार की अध्यक्षता सप्त शक्ति कमांड के आर्मी कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल मनजिंदर सिंह ने की। आयोजन में प्रमुख वक्ताओं के रूप में राजदूत पिनाक राजन चक्रवर्ती, आईएफएस (सेवानिवृत्त), राजदूत पंकज सरन, आईएफएस (सेवानिवृत्त) और राजदूत सतीश मेहता, आईएफएस (सेवानिवृत्त) शामिल हुए। इन सभी वक्ताओं ने भारत-बांग्लादेश संबंधों, उभरते भू राजनीतिक रुझानों और क्षेत्रीय स्थिरता पर अपना दृष्टिकोण साझा किया।
इस सेमिनार में भारत और बांग्लादेश के बीच स्थिर और पारस्परिक रूप से लाभकारी संबंधों को बढ़ावा देने के लिए आवश्यक शांति और सुरक्षा पहलुओं, आर्थिक सहयोग और कूटनीतिक रणनीतियों पर जोर दिया गया। दरअसल, ज्ञान शक्ति थिंक टैंक राष्ट्रीय सुरक्षा और क्षेत्रीय भू-राजनीति पर सूचित चर्चा को बढ़ावा देने, राष्ट्र निर्माण में पूर्व सैनिकों की भूमिका को सशक्त करने और रक्षा पारिस्थितिकी तंत्र में भारत की आत्मनिर्भरता को सुदृढ़ करने के लिए प्रतिबद्ध है।