भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) और मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। एक मीडिया रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि गोवा के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) ने 'ईसीआई-नेट' सॉफ्टवेयर द्वारा हटाए गए वैध मतदाताओं के नाम वापस जोड़ने के लिए निर्वाचन आयोग को सात दिनों में आठ बार पत्र लिखा, लेकिन इसके बावजूद इन मतदाताओं के नाम नहीं जोड़े गए।
इस खुलासे के बाद कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सीईसी ज्ञानेश कुमार के तत्काल इस्तीफे की मांग की है। वहीं शशि थरूर जैसे दिग्गज कांग्रेसी नेताओं ने भी चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। दूसरी तरफ, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे विपक्ष का 'देशव्यापी दुष्प्रचार अभियान' करार दिया है।
जयराम रमेश का तीखा हमला
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा कि गोवा के निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों (ईआरओ) ने पुष्टि की थी कि हटाए गए लोग वैध मतदाता थे। इसके बावजूद गोवा सीईओ के आठ ईमेल को नजरअंदाज कर दिया गया और मतदाताओं को सूची से बाहर रखा गया।
रमेश ने आरोप लगाया कि पूरी एसआईआर प्रक्रिया को ईसीआई-नेट सॉफ्टवेयर के हवाले कर दिया गया है। इसके तीसरे चरण में दिल्ली के 54 प्रतिशत और सभी राज्यों में करीब 12 करोड़ मतदाताओं के नाम या तो हटा दिए गए हैं या उन पर आपत्ति दर्ज कर दी गई है। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधित्व कानून, 1950 के तहत वोटर लिस्ट पर वैधानिक अधिकार ईआरओ के पास होता है, लेकिन सॉफ्टवेयर तक उनकी पहुंच को सीमित कर दिया गया। इस उल्लंघन को लेकर दो चुनाव आयुक्तों ने कैबिनेट सचिव को भी पत्र लिखा था।
जयराम रमेश ने कहा कि फॉर्म छह के जरिए नए मतदाताओं को जोड़ने की प्रक्रिया को भी कठिन बना दिया गया है और जेन-जी युवाओं को बाहर करने का निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मीडिया रिपोर्ट से साबित हो रहा है कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पिछले दो साल से हरियाणा और महाराष्ट्र चुनाव के नतीजों के बाद से जो कह रहे थे, वह सच था- चुनावी प्रक्रिया से पूरी तरह समझौता किया जा चुका है।
सीईसी पर निशाना साधते हुए रमेश ने कहा- यह ज्ञानेश कुमार द्वारा 'मेथड ऑफ डिसएनफ्रैंचाइजिंग इंडियंस' (एमओडीआई) को लागू करना है। पहली फुर्सत में उन्हें इस्तीफा देना चाहिए। इसके बाद प्रधानमंत्री और गृह मंत्री को उनकी इस योजना के लिए जवाबदेह ठहराया जाएगा।
शशि थरूर ने भी उठाए सवाल
वहीं, कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने इसे नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों का हनन बताते हुए कहा कि चुनाव आयोग को देश से माफी मांगनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यह केवल राजनीतिक छल नहीं बल्कि अमानवीय आचरण है, जिससे नागरिकों को जरूरी मानवीय सुविधाओं से भी वंचित होना पड़ रहा है। उन्होंने सॉफ्टवेयर को वापस लेने और नुकसान की भरपाई की मांग की।
भाजपा ने क्या कहा?
झारखंड भाजपा के मुख्य प्रवक्ता प्रतुल शाह देव ने कांग्रेस के इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे संवैधानिक संस्थाओं को बदनाम करने की साजिश बताया। एक समाचार एजेंसी से बात करते हुए उन्होंने कहा कि बार-बार चुनाव हारने वाली पार्टियां प्लांट की गई खबरों के जरिए देशव्यापी दुष्प्रचार चला रही हैं। खबर छपने के 10 मिनट के भीतर नेताओं के सोशल मीडिया पोस्ट आ जाना साबित करता है कि इसके पीछे कोई मिलीभगत है।
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शाह देव ने कहा कि चुनाव आयोग ने 12 राज्यों में कुशलतापूर्वक और सुचारू रूप से चुनाव कराए हैं। उन्होंने कांग्रेस पर पलटवार करते हुए आरोप लगाया कि चुनाव आयोग का असली राजनीतिकरण तब हुआ था जब पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एम.एस. गिल पद से हटने के बाद यूपीए सरकार में 10 साल तक केंद्रीय मंत्री रहे थे। गौरतलब है कि हालिया मीडिया रिपोर्ट से पहले यह भी सामने आया था कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में एसआईआर प्रक्रिया से जुड़े फैसलों और आदेशों पर कम से कम 14 बार अपनी आपत्तियां दर्ज कराई थीं।