तहलका मैगजीन के संस्थापक तरुण तेजपाल को 2013 के यौन उत्पीड़न मामले में दोषमुक्त करते हुए गोवा सत्र न्यायालय ने अपने फैसले में कहा, पीड़िता का बर्ताव बिल्कुल सामान्य है, उनके हावभाव से यह कतई नहीं लगता कि उनका यौन उत्पीड़न हुआ या कोई मानसिक आघात पहुंचा।
गोवा सत्र न्यायालय का 527 पन्ने का आदेश जारी
कोर्ट ने तेजपाल को 21 मई को आरोपों से बरी किया था, 527 पन्ने का आदेश मंगलवार देर रात जारी हुआ है। सत्र न्यायाधीश क्षमा जोशी ने अपने आदेश में लिखा, पीड़िता जिस तरह से आरोपी को कथित यौन उत्पीड़न के बाद आरोपी के बिना पूछे अपनी लोकेशन भेज रही है, यह उसके साथ किसी तरह के दुर्व्यवहार (जैसा कि पीड़िता ने बयां किया) का संकेत नहीं देता। इनका व्यवहार और रवैया किसी यौन पीड़ित जैसा बिल्कुल नहीं है।
तेजपाल पर अपनी एक सहकर्मी के साथ 2013 के एक आयोजन में गोवा के पांच सितारा होटल की लिफ्ट में यौन उत्पीड़न का आरोप लगा था। कोर्ट ने कहा, कथित दुर्व्यवहार के बाद के सीसीटीवी फुटेज और फोटोग्राफ में साफ दिख रहा है कि पीड़िता अच्छे मूड में है, खुश है और बिल्कुल सामान्य व्यवहार कर रही है।
उन पर किसी तरह का तनाव या दर्द नहीं दिखाई दे रहा है। इनमें लिफ्ट से बाहर आते वक्त उनके चेहरे पर कोई शिकन या आंखों में आंसू नहीं दिख रहे हैं, जैसा कि उन्होंने कोर्ट को बताया। कोर्ट ने कहा, रेप या यौन उत्पीड़न जो गहरा सदमा देते हैं उसे झुठलाया नहीं जा सकता, लेकिन इस मामले में पीड़िता के हाव-भाव में दूर-दूर तक ऐसा नहीं दिखाई देता। इस लिए अदालत को लगता है कि आरोपी पर लगाए गए तमाम आरोप सही साबित नहीं होते।
पीड़िता को कोई चोट भी नहीं आई
कोर्ट ने कहा, जैसा कि पीड़िता का दावा है कि यौन उत्पीड़न के दौरान उसकी आरोपी के साथ जोर झपट हुई तो उनके शरीर पर कोई चोट भी आनी चाहिए थी। लेकिन यहां तो एक खरोंच तक नहीं आई। साथ ही पीड़िता पढ़ी-लिखी है और कानून को समझती भी है।
ऐसे में जोर जबरदस्ती के दौरान उसने आरोपी को धक्का जरूर दिया होता, आखिर वह भी एक पत्रकार है लेकिन उसने ऐसा कुछ भी नहीं किया। इससे साफ है कि यौन उत्पीड़न की जो कहानी कोर्ट में सुनाई गई वह वास्तव में मूल घटनाक्रम से अलग है।