गोवा में मनोहर परिकर के निधन के बाद राजनीतिक संकट शुरू हो गया है। अभी नई सरकार बनने में समय है। वहीं भाजपा जहां अपनी सरकार बचाने में जुटी हुई है वहीं कांग्रेस ने 48 घंटों के अंदर दूसरी बार राज्यपाल को पत्र लिखकर सरकार बनाने का दावा पेश किया है। देर रात केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी राज्य पहुंचे और विधायकों के साथ बैठक की। भाजपा नेता विश्वजीत राणे और एमजीपी नेता सुदीन धवलीकर बैठक में शामिल हुए। ऐसी खबर है कि इन्होंने मुख्यमंत्री बनने की इच्छा जताई है। तीसरे उम्मीदवार प्रमोद सावंत बैठक में मौजूद नहीं थे। हालांकि, गोवा विधानसभा के स्पीकर प्रमोद सावंत मुख्यमंत्री बनाए जाने की दौड़ में सबसे आगे नजर आ रहे हैं। धवलीकर ने कहा कि नेतृत्व के मुद्दे पर दोपहर तीन बजे तक तस्वीर साफ होने की उम्मीद है।
सूत्र बता रहे हैं कि इन सब के बीच गोवा विधानसभा के स्पीकर प्रमोद सावंत मुख्यमंत्री बनाए जाने की दौड़ में सबसे आगे नजर आ रहे हैं। इस बारे में अंतिम फैसला एक-दो दिन में कर लिया जाएगा।
राज्य में मौजूद विधायकों की वर्तमान संख्या फिलहाल किसी पार्टी के पक्ष में नहीं है। वहीं इस समय किसी भी पार्टी ने मुख्यमंत्री उम्मीदवार का चुनाव नहीं किया है जो सदन में बहुमत साबित कर सके। राज्य में विधानसभा की 36 सीटे हैं। परिकर और फ्रांसिस डिसूजा के निधन से भाजपा की दो सीटें कम हो गई हैं। वहीं कांग्रेस के दो विधायक इस्तीफा दे चुके हैं। इस समय 14 विधायकों के साथ कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी है।
रिपोर्ट के मुताबिक कहा जा रहा था कि भाजपा गोवा के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस विधायक दिगंबर कामत को मुख्यमंत्री पद की पेशकश कर रही है। इसपर कामत का बयान आया है। उन्होंने रविवार को कहा कि उन्हें भाजपा से गोवा का मुख्यमंत्री बनने का कोई ऑफर नहीं मिला है।
कामत ने कहा, "दिल्ली का मेरा कार्यक्रम 2-3 दिन पहले बन गया था। किसी से मिलने का सवाल ही नहीं उठता। मैं दिल्ली अपने निजी काम के लिए गया था। इस तरह की खबरों को अपने स्वार्थ की पूर्ति के लिए बनाया गया है। मुझे भाजपा से कोई पेशकश नहीं मिली है। यदि मेरी किस्मत में गोवा का मुख्यमंत्री बनना लिखा होगा तो कोई मुझे उससे रोक नहीं सकता है।"
कांग्रेस और भाजपा ने देर रात अपने विधायक दल की बैठक बुलाई ताकि मुख्यमंत्री उम्मीदवार का चयन हो सके, लेकिन दोनों ही पार्टियों में आम सहमति नहीं बन पाई है। केंद्रीय मंत्री गडकरी ने गोवा फॉरवर्ड पार्टी के नेता विजय सरदेसाई के आवास पर विधायकों के साथ बैठक की। बैठक के बाद सरदेसाई ने कहा कि उन्होंने परिकर को अपना समर्थन दिया था न कि भाजपा को। अब जब परिकर नहीं हैं तो उनके पास विकल्प खुले हुए हैं। उनका कहना है कि वह राज्य में स्थिरता चाहते हैं। वह नहीं चाहते कि राज्यपाल सदन को भंग कर दें।