तहलका के पूर्व प्रधान संपादक तरुण तेजपाल के खिलाफ चल रहे दुष्कर्म के मामले में गोवा की एक सत्र अदालत ने मंगलवार को कहा कि वह तरुण तेजपाल मामले में फैसला 12 मई को सुनाएगी। तेजपाल पर 2013 में गोवा के एक होटल की लिफ्ट के भीतर एक महिला सहयोगी का यौन उत्पीड़न करने का आरोप लगा था।
अतिरिक्त जिला अदालत मंगलवार को फैसला सुनाने वाली थी, लेकिन न्यायाधीश क्षमा जोशी ने 12 मई तक फैसला सुनाने की कार्यवाही टाल दी है। लोक अभियोजक फ्रांसिस्को तवारेस ने कहा कि न्यायाधीश ने बिना कोई कारण बताए फैसला सुनाने की कार्यवाही टाल दी है।
बता दें कि गोवा पुलिस ने नवंबर 2013 में तेजपाल के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी जिसके बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था। वह मई 2014 से जमानत पर हैं। गोवा की अपराध शाखा ने तेजपाल के खिलाफ एक आरोपपत्र दाखिल किया था।
तेजपाल भारतीय दंड संहिता की धारा 341 (गलत तरीके से रोकने), 342 (रोककर रखना), 354 (गरिमा भंग करने की मंशा से प्रताड़ना), 354-ए (यौन उत्पीड़न), 354 बी (महिला पर हमला या आपराधिक बल प्रयोग), 376 (2) (एफ) (ऊंचे पद पर आसीन व्यक्ति द्वारा महिला के खिलाफ अपराध) और 376 (2) (के) (ऊंचे पद पर आसीन व्यक्ति द्वारा बलात्कार) के तहत मुकदमे का सामना कर रहे हैं।
नवंबर 2013 में हुई थी गिरफ्तारी
बता दें कि तरुण तेजपाल को 30 नवंबर 2013 को गिरफ्तार किया था। तरुण तेजपाल पर अपनी सहकर्मी के साथ दुष्कर्म करने का आरोप है। उत्तरी गोवा के पांच सितारा होटल में तरुण तेजपाल ने अपनी सहकर्मी के साथ दुष्कर्म किया था। अभी वो जमानत पर है।
तरुण तेजपाल पर आईपीसी की कई धाराओं के तहत मामले दर्ज
अतिरिक्त जिला और सत्र अदालत के न्यायाधीश ने आठ मार्च को तेजपाल मामले में अंतिम बहस सुनी थी और मामले को लेकर फैसला सुनाने के लिए बाद की तारीख को तय किया। 29 सितंबर 2017 को कोर्ट ने तरुण तेजपाल पर आईपीसी की कई धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया, जिसमें दुष्कर्म, शारीरिक यौन शोषण और गलत बंदी शामिल है।
तेजपाल ने अपने खिलाफ लगाए गए आरोपों को खारिज करने के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। अगस्त में, सुप्रीम कोर्ट ने आरोपों को खारिज करने से इनकार कर दिया और मामले को छह महीने के भीतर निपटाने का निर्देश दिया।