गोवा से कांग्रेस राज्यसभा सांसद ने सुप्रीम कोर्ट के "मूल संरचना" पर सवाल उठाया है। उन्होंने वित्त मंत्री अरुण जेटली से सवाल करते हुए कहा कि वो संसदीय अधिकारों के लिए न्यायिक अतिक्रमणों के खिलाफ क्या काम किया हैं। उन्होंने न्यायिक सक्रियता पर चर्चा के लिए एक विशेष सत्र के बारे में वित्त मंत्री से सवाल किया है।
सांसद शांताराम नाईक ने "मूलभूत संरचना सिद्धांत" की वैधता पर सवाल उठाया है, जिसमें सुप्रीम कोर्ट के फैसले का समर्थन किया गया है। उनका कहना है कि इसके तहत संविधान के मूलभूत अधिकारों सहित बुनियादी सुविधाओं को बदला नहीं जा सकता है। उन्होंने 1973 के केसावानंद भारती केस मामले में कोर्ट का समर्थन किया है।
नायक ने इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में कहा कि "मुझे लगता है कि समय आ गया है कि भाजपा ऐसा कर सकती है। वे इस सिद्धांत को चुनौती दे सकती हैं।" उन्होंने कहा कि लोकसभा में बीजेपी का बहुमत है और राज्य सभा में भी वे सहमति जता सकती हैं। लेकिन केवल भाजपा ही इस पर कार्रवाई कर सकता है और न्यायपालिका द्वारा इस व्यवस्थित अतिक्रमण को रोका जा सकता है।"
गौरतलब है कि राज्यसभा में नाईक का कार्यकाल 20 जुलाई, 2017 को समाप्त हो रहा है। वह कानून की संसदीय स्थायी समिति के अध्यक्ष रहे हैं।