कांग्रेस में एक बार फिर बड़ी सेंध लगी है। इस बार कांग्रेस के विधायक गोवा में टूटे हैं। कांग्रेस नेताओं की यह टूट राजनीतिक लिहाज से इसलिए और महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि कांग्रेस अपने संगठन और जनाधार को मजबूत करने के लिए भारत जोड़ो यात्रा कर रही है। कांग्रेस में हो रहे बिखराव को लेकर कांग्रेस के ही बड़े नेता एक दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषक भी मानते हैं कि पार्टी में संगठनात्मक स्तर पर जब तक बड़े फेरबदल नहीं होंगे और नेतृत्व के साथ बेहतर सामंजस्य नहीं होगा तब तक ऐसी परिस्थितियां बनती रहेंगी।
कांग्रेस के बड़े नेताओं के छोड़ने का सिलसिला चल ही रहा था कि अचानक गोवा में कांग्रेस के बड़े जनाधार वाले नेताओं ने पार्टी का दामन छोड़ दिया। कांग्रेस से जुड़े वरिष्ठ नेता और पूर्व पदाधिकारी बताते हैं कि पार्टी में सबसे बड़ा संकट इस वक्त विश्वास का बना हुआ है। उनका कहना है पार्टी 'भारत जोड़ो यात्रा' तो कर रही है, लेकिन नेताओं में जिस तरीके से आपसी मनमुटाव और वाद-विवाद खुलकर सामने आ रहा है वह पार्टी के लिए बेहतर नहीं है। उक्त नेता का कहना है कि जब तक संगठनात्मक स्तर पर बड़े फेरबदल नहीं होंगे और पार्टी के मुखिया के साथ जब तक जमीन से जुड़े हर नेता का बेहतर सामंजस्य नहीं होगा तब तक पार्टी में बहुत कुछ बदलने जैसी उम्मीद करना बड़ा मुश्किल लगता है।
वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक ओपी मिश्रा कहते हैं कि जब भी कोई राजनैतिक दल लोगों के बीच में जाता है और उनसे सीधे मिलता है तो निश्चित तौर पर उससे जुड़ाव बनता ही बनता है। भारत जोड़ो यात्रा के माध्यम से कांग्रेस कुछ ऐसा ही कर रही है। मिश्रा कहते हैं कि लेकिन इतने बड़े आयोजन के बीच में पार्टी को इस तरीके के झटके बड़ा नुकसान पहुंचाने वाले हैं। वह कहते हैं कि गोवा में विधायकों का एक बड़ा समूह का टूट जाना बताता है कि इन नेताओं की अपने आलाकमान के साथ या दूसरे ने बड़े नेताओं के साथ कैसी बॉन्डिंग रही होगी। उनका कहना है सिर्फ गोवा में ही नहीं, बल्कि राजस्थान में जिस तरीके से पार्टी नेताओं के बीच में वाद-विवाद जनता के बीच में आता रहता है, उससे विपक्षी पार्टी को मजबूत होने में बल मिलता है। ऐसे में कई बार पार्टी के बड़े नेता अपने भविष्य तलाशते हुए दामन भी छोड़ते हैं और नए दलों में जाकर अपनी मजबूत दावेदारी भी पेश करते हैं।