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गोवा विधानसभा में एसटी आरक्षण का रास्ता साफ: पहली बार चार सीटें होंगी आरक्षित, केंद्र ने जारी की अधिसूचना

Fri, 07 Aug 2026 12:03 AM IST
Devesh Tripathi पीटीआई, पणजी

सार

केंद्र सरकार ने गोवा विधानसभा में अनुसूचित जनजाति समुदाय को राजनीतिक आरक्षण देने वाला अधिनियम लागू कर दिया है। इसके बाद पहली बार चार विधानसभा सीटें एसटी उम्मीदवारों के लिए आरक्षित होंगी।
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गोवा विधानसभा - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स/ANI
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विस्तार
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केंद्र सरकार ने गुरुवार को उस अधिनियम को अधिसूचित कर दिया, जिसके बाद गोवा की 40 सदस्यीय विधानसभा में अनुसूचित जनजाति (एसटी) समुदाय को राजनीतिक आरक्षण का रास्ता साफ हो गया है। संसद से पहले ही पारित इस अधिनियम के लागू होने के साथ गोवा विधानसभा में पहली बार एसटी समुदाय के उम्मीदवारों के लिए चार सीटें आरक्षित होंगी।
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केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना में कहा गया है, "गोवा राज्य के विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों में अनुसूचित जनजातियों के प्रतिनिधित्व के पुनर्समायोजन अधिनियम, 2025 (2025 का अधिनियम 21) की धारा 1 की उपधारा (2) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए केंद्र सरकार 6 अगस्त, 2026 को वह तिथि नियुक्त करती है, जिस दिन से उक्त अधिनियम के प्रावधान लागू होंगे।"

गोवा के सीएम सावंत ने की थी केंद्रीय गृह मंत्री से मुलाकात
अधिनियम लागू होने पर मुख्यमंत्री ने इसका स्वागत किया। उन्होंने एक्स पर लिखा, "एक और वादा पूरा हुआ। मैं आज से एसटी विधानसभा प्रतिनिधित्व अधिनियम लागू होने का तहे दिल से स्वागत करता हूं। इस अधिनियम के लागू होने के साथ ही गोवा अपने अनुसूचित जनजाति समुदाय के लिए विधानसभा सीटें आरक्षित करने की दिशा में निर्णायक कदम बढ़ा रहा है। यह हमारे आदिवासी भाई-बहनों को लंबे समय से लंबित न्याय दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।"
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उन्होंने आगे लिखा, "माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और माननीय गृह मंत्री अमित शाह का हृदय से आभार। सबका साथ, सबका विकास।" गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने हाल ही में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात कर विधानसभा में एसटी समुदाय को आरक्षण देने की प्रक्रिया में तेजी लाने का आग्रह किया था। राज्य में विधानसभा चुनाव अगले वर्ष की शुरुआत में होने हैं।

सामाजिक न्याय के आंदोलन की बड़ी जीत : भाजपा विधायक गोविंद गावड़े
आदिवासी नेता और भाजपा विधायक गोविंद गावड़े ने इसे सामाजिक न्याय के आंदोलन की बड़ी जीत बताया। उन्होंने कहा, "यह सामाजिक न्याय के आंदोलन की बड़ी जीत है। यह एक क्रांति की जीत है। इस क्रांति की ताकत आज दिखाई दे रही है। यह असंभव को भी संभव बना सकती है।"

गावड़े ने कहा कि वह उस दबाव समूह का हिस्सा थे, जिसने वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले आदिवासी समुदाय को राजनीतिक आरक्षण देने की प्रक्रिया तेज करने की मांग की थी। उन्होंने कहा कि अब विधानसभा क्षेत्रों की जनसंख्या के आंकड़ों को ध्यान में रखते हुए आरक्षण की प्रक्रिया शुरू होनी चाहिए। इसके बाद जनप्रतिनिधित्व अधिनियम को लागू करना निर्वाचन आयोग की जिम्मेदारी होगी।
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