दार्जिलिंग से गोरखा नेशनल लिब्रेशन फ्रंट (जीएनएलएफ) के विधायक नीरज तमांग जिम्बा ने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह को पत्र लिखा है। उन्होंने गोरखा नेता सुभाष घीसिंग को 'गोरखाओं के बीच राजनीतिक चेतना व राष्ट्रीय पहचान लाने' के लिए पद्म पुरस्कार देने का अनुरोध किया है।
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गोरखा नेशनल लिबरेशन फ्रंट (जीएनएलएफ) के संस्थापक सुभाष घीसिंग का 78 वर्ष की उम्र में निधन हो गया था। उन्हें लिवर सिरोसिस की बीमारी थी। साल 2015 में दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल में उन्होंने अंतिम सांस ली थी।घीसिंग दार्जिलिंग गोरखा हिल काउंसिल के अध्यक्ष भी रहे। दार्जिलिंग में रहने वाले गोरखाओं के लिए अलग राज्य की मांग के समर्थन में उन्होंने लंबा आंदोलन छेड़ा था। जीएनएलएफ के आंदोलन की वजह से 1986 और 1988 में भारी हिंसा हुई।
इसके बाद केंद्र और पश्चिम बंगाल सरकार से लंबी वार्ताओं का दौर चला। आखिर में 1988 में समझौते के तहत अर्द्ध स्वायत्त संस्था दार्जिलिंग गोरखा हिल काउंसिल की स्थापना की गई। इसका चुनाव जीतने के बाद घीसिंग इसके पहले अध्यक्ष बने।
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घीसिंग का जन्म दार्जिलिंग के मंजू टी एस्टेट में 22 जून 1936 को हुआ था। वह 1954 में भारतीय सेना के गोरखा राइफल्स में शामिल हुए। लेकिन 1960 में उन्होंने सेना की नौकरी छोड़ दी। गोरखाओं के अधिकारों की लड़ाई तेज करने के लिए उन्होंने 1968 में नीलो झांडा नाम का संगठन शुरू किया।