फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Global Warming: शहरों में बढ़ रही है चूहों की आबादी, अध्ययन का निष्कर्ष- उच्च तापमान और आबादी से अनुकूल माहौल

Thu, 06 Feb 2025 05:17 AM IST
दीपक कुमार शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली

सार

शोधकर्ताओं ने अध्ययन में 16 शहर शामिल किए, जिनमें से 11 में चूहों की संख्या में भारी वृद्धि दर्ज की गई। अध्ययन में पाया गया कि चूहों की आबादी में तेजी से बदलाव में तापमान की अहम भूमिका होती है। जिन शहरों में औसत तापमान सामान्य से ज्यादा था वहां चूहों की संख्या में 40.7 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई।
विज्ञापन
चूहा - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

दुनियाभर के प्रमुख शहरों में चूहों की आबादी तेजी से बढ़ रही है। इसका प्रमुख कारण ग्लोबल वार्मिंग के साथ तेजी से बढ़ता शहरीकरण है। चूहों को 50 से अधिक जूनोटिक रोगों के प्रसार के लिए जाना जाता है। जूनोटिक रोग ऐसे संक्रमण हैं, जो लोगों और जानवरों के बीच फैलते हैं। ये संक्रमण वायरस, बैक्टीरिया, परजीवी और कवक जैसे कीटाणुओं के कारण होते हैं। इनमें से कुछ जानलेवा हो सकते हैं। इससे स्वास्थ्य क्षेत्र में चिंताएं तेजी से बढ़ रही हैं। यह बात साइंस एडवांसेज पत्रिका में प्रकाशित शोध में कही गई है।

विज्ञापन


शोधकर्ताओं ने अध्ययन में 16 शहर शामिल किए, जिनमें से 11 में चूहों की संख्या में भारी वृद्धि दर्ज की गई। अध्ययन में पाया गया कि चूहों की आबादी में तेजी से बदलाव में तापमान की अहम भूमिका होती है। जिन शहरों में औसत तापमान सामान्य से ज्यादा था वहां चूहों की संख्या में 40.7 फीसदी  की  वृद्धि दर्ज की गई। जबकि जहां तापमान सामान्य से कम दर्ज किया गया वहां चूहों की संख्या में कमी पाई गई।

कृषि उपज को पहुंचाते हैं सर्वाधिक नुकसान
अध्ययन के दौरान चूहों की दो प्रजातियों रैट्स नॉर्वेजिकस और रैट्स पर ध्यान केंद्रित किया गया जो वैश्विक रूप से फैले हुए हैं। ये कृषि उपज और खाद्य आपूर्ति को सबसे अधिक नुकसान पहुंचाने के लिए जिम्मेदार माने जाते हैं। अकेले अमेरिका में इन चूहों द्वारा होने वाले नुकसान की कुल अनुमानित लागत सालाना लगभग 27 बिलियन डॉलर आंकी गई है।

  • दुनियाभर में चूहों से होने वाले नुकसान का अनुमान इसी बात से लगाया जा सकता है कि वैश्विक स्तर पर इन्हें नियंत्रित करने के लिए हर साल लगभग 500 मिलियन डॉलर खर्च होते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें