विश्व मौसम संगठन (डब्ल्यूएमओ) के अनुसार, इसके साथ ही, सूखा, लू, भारी बारिश जैसी मौसमी घटनाएं बढ़ सकती हैं, जो बाढ़, बीमारियों और कीटों के हमलों को बढ़ावा देकर फसलों की पैदावार और गुणवत्ता पर असर डाल सकती हैं।
आने वाले तीन महीनों मार्च से मई 2025 के दौरान वैश्विक स्तर पर तापमान सामान्य से अधिक रहने की संभावना है। खासकर अरब प्रायद्वीप, उत्तर-पूर्वी एशिया, पश्चिमी तटीय भारत और दक्षिण-पूर्व एशिया में अधिक गर्मी दर्ज की जा सकती है।
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विश्व मौसम संगठन (डब्ल्यूएमओ) के अनुसार, इसके साथ ही, सूखा, लू, भारी बारिश जैसी मौसमी घटनाएं बढ़ सकती हैं, जो बाढ़, बीमारियों और कीटों के हमलों को बढ़ावा देकर फसलों की पैदावार और गुणवत्ता पर असर डाल सकती हैं। पिछले तीन महीनों (नवंबर 2024 से जनवरी 2025) के मौसम के आंकड़ों के आधार पर यह अनुमान लगाया गया है कि आगामी मौसम में उतार-चढ़ाव देखने को मिलेंगे, लेकिन गर्मी सामान्य से अधिक बनी रहेगी। डब्ल्यूएमओ की रिपोर्ट बताती है कि नवंबर 2024 से जनवरी 2025 के बीच ज्यादातर महासागरों में समुद्री सतह का तापमान (एसएसटी) सामान्य से अधिक था।
अल नीनो या ला नीना का प्रभाव नहीं
मार्च से मई 2025 तक प्रशांत महासागर के कुछ हिस्सों में समुद्र की सतह का तापमान सामान्य होने की उम्मीद है, जिससे इस दौरान कोई मजबूत अल नीनो या ला नीना प्रभावी नहीं रहेगा। यह स्थिति अल नीनो-दक्षिणी दोलन (ईएनएसओ) की तटस्थ अवस्था को दर्शाती है। हालांकि, भूमध्यरेखीय अटलांटिक महासागर के उत्तरी और दक्षिणी भागों में तापमान सामान्य से अधिक रहने की संभावना है।
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दुनिया के जिन इलाकों में तापमान सामान्य से अधिक रहने की आशंका है, उनमें अफ्रीका के बड़े हिस्से, मेडागास्कर, ज्यादातर एशियाई क्षेत्र, दक्षिण अमेरिका के कुछ भाग, कैरिबियन, मध्य अमेरिका, उत्तरी अमेरिका के दक्षिणी और पूर्वी हिस्से, पश्चिमी प्रशांत और पूरा यूरोप शामिल हैं। विशेष रूप से अरब प्रायद्वीप, उत्तर-पूर्वी एशिया, पश्चिमी तटीय भारत और दक्षिण-पूर्व एशिया में तापमान सामान्य से कहीं अधिक हो सकता है।