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Pollution: 2040 तक तीन गुना हो जाएगा वैश्विक प्लास्टिक प्रदूषण, दुनिया के 52 फीसदी कचरे में भारत भी जिम्मेदार

Thu, 03 Aug 2023 06:17 AM IST
जलज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

स्विस अनुसंधान परामर्शदाता अर्थ एक्शन (ईए) के अनुसार चीन, ब्राजील, इंडोनेशिया, थाईलैंड, रूस, मैक्सिको, अमेरिका, सउदी अरब, कांगो, ईरान और कजाकिस्तान के साथ भारत उन 12 देशों में शामिल है, जो दुनिया के 52 फीसदी कुप्रबंधित प्लास्टिक कचरे के लिए जिम्मेदार है।
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विस्तार
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अपशिष्ट प्रबंधन क्षमता के कारण इस साल लगभग 6,86,42,999 टन अतिरिक्त प्लास्टिक कचरा प्रकृति में समाप्त हो जाएगा, बावजूद 2040 तक वैश्विक प्लास्टिक प्रदूषण तीन गुना हो जाएगा। 2023 में उत्पादित होने वाले 159 मिलियन टन प्लास्टिक में से 43 फीसदी (68.5 मिलियन टन) प्रदूषण का कारण बनेगा।

स्विस अनुसंधान परामर्शदाता अर्थ एक्शन (ईए) के अनुसार चीन, ब्राजील, इंडोनेशिया, थाईलैंड, रूस, मैक्सिको, अमेरिका, सउदी अरब, कांगो, ईरान और कजाकिस्तान के साथ भारत उन 12 देशों में शामिल है, जो दुनिया के 52 फीसदी कुप्रबंधित प्लास्टिक कचरे के लिए जिम्मेदार है। 28 जुलाई को पृथ्वी ने अपना पहला ओवरशूट दिवस देखा। ईए के अनुसार ओवरशूट दिवस यानी वह बिंदु जब प्लास्टिक की मात्रा वैश्विक अपशिष्ट प्रबंधन क्षमता से अधिक हो जाती है।

रिपोर्ट के अनुसार प्लास्टिक ओवरशूट दिवस, देश के कुप्रबंधित अपशिष्ट सूचकांक (एमडब्ल्यूआई) के आधार पर निर्धारित किया जाता है। उत्पादित और उपयोग किए जाने वाले प्लास्टिक की मात्रा के बीच असंतुलन होने पर जब वे अपशिष्ट बन जाते हैं, जो प्रदूषण का मूल कारण है। अपशिष्ट प्रबंधन क्षमता और प्लास्टिक खपत के अंतर को एमडब्ल्यूआई कहा जाता है। सबसे अधित कुप्रबंधन करने वाले मोजाम्बिक (99.8%), नाइजीरिया (99.44%) और केन्या (98.9%) अफ्रीकी देश हैं। ईए रिपोर्ट के अनुसार भारत एमडब्ल्यूआई में चौथे स्थान पर है। यहां उत्पन्न  कुल प्लास्टिक कचरे का 98.55 फीसदी कुप्रबंधन होता है।

प्रति व्यक्ति प्लास्टिक खपत में आइसलैंड सबसे आगे है, जहां प्रति व्यक्ति वार्षिक खपत 128.9 किलोग्राम है। यह भारत में प्रति व्यक्ति 5.3 किलोग्राम की वार्षिक खपत से 24.3 गुना अधिक है। प्रति व्यक्ति प्रति वर्ष प्लास्टिक की वैश्विक औसत खपत 20.9 किलोग्राम है।

भारत में 12.3 फीसदी प्लास्टिक कचरा रीसाइकिल

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हालांकि विशेषज्ञों के अनुसार रिपोर्ट के सूचकांक को चुनौती दी जा सकती है, क्योंकि इसमें जानकारी के स्रोत का उल्लेख नहीं किया गया है। भारत अपने प्लास्टिक कचरे का 12.3 फीसदी पुनर्चक्रित करता है और 20 फीसदी जला देता है। पर्यावरण, वन और जलवायु प्रबंधन मंत्रालय द्वारा विकसित केंद्रीकृत ईपीआर पोर्टल यह जानकारी देता है कि भारत के पास सालाना 14.2 मिलियन टन प्लास्टिक कचरे को संसाधित (प्रोसेस्ड) करने की संचयी क्षमता है। इसमें रीसाइक्लिंग और भस्मीकरण शामिल हैं। इससे साबित होता है कि देश के पास, उत्पादित सभी प्राथमिक प्लास्टिक का 71 फीसदी संसाधित करने की क्षमता है।

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