अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में पिछले 6 हफ्तों में काफी गिरावट देखने को मिली है। तेल की कीमत 86.29 डॉलर प्रति बैरल से घटकर अब 63.3 डॉलर प्रति बैरल हो गई है। भारत में भी पेट्रोल और डीजल के दामों में कुछ गिरावट आई है। वहीं रुपया भी डॉलर की तुलना में मजबूत हुआ है। 3 अक्तूबर से 21 नवंबर के बीच कच्चे तेल की कीमतें 36.31 प्रतिशत से 63.3 रुपये प्रति बैरल तक घटे हैं। दिल्ली में पेट्रोल और डीजल की कीमतें क्रमश: 8.9 और 5.28 प्रतिशत घटी हैं।
3 अक्तूबर को पेट्रोल की कीमत 83.85 रुपये प्रति लीटर थी। वहीं 21 नवंबर को इसकी कीमत 76.30 रुपये प्रति लीटर रही। डीजल की बात करें तो 3 अक्तूबर को इसकी कीमत 75.25 तो 21 नंवबर को 71.25 रुपये प्रति लीटर रही। इसी अवधि के दौरान डॉलर के मुकाबले रुपया 2.64 प्रतिशत मजबूत हुआ। एक डॉलर की कीमत 21 नवंबर को 71.30 रुपये थी। कच्चे तेल की घटती कीमतों के पीछे काफी सारे कारण रहे। जिसमें से मुख्य कारण यह हैं-
- सऊदी अरब और दूसरे तेल निर्माता देश जो 2017 तक ज्यादा मात्रा में तेल का उत्पादन करते थे उन्होंने अब पर्याप्त मात्रा में तेल का उत्पादन करना शुरू कर दिया ताकि उपभोक्ताओं की परेशानियां कम हो सके।
- ठीक इसी समय अमेरिका में तेल का उत्पादन अपेक्षा से ज्यादा बढ़ने लगा। युद्धरत होने के बावजूद लिबिया में तेल का उत्पादन बढ़ा। वहीं अशांत देश वेनेजुएला में भी तेल का उत्पादन उम्मीद से बेहतर हुआ। दुनियाभर में एक बार फिर से तेल का भंडारण होना शुरू हुआ।
- डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान पर लगाए प्रतिबंधों का भारत के तेल उत्पादन पर कोई खास प्रभाव नहीं पड़ा। ऐसा इसलिए क्योंकि ट्रंप ने ईरान के सबसे बड़े ग्राहक देशों- जापान, चीन और भारत को अस्थायी रूप से तेल खरीदने की अनुमति दे दी।