दुनिया में संपत्ति बढ़ रही है, लेकिन करोड़ों लोगों को आज भी बुनियादी जरूरतें नसीब नहीं हैं। वैश्विक आंकड़े अमीरों और गरीबों के बीच गहरी खाई दिखाते हैं, तो भारत में संपत्ति के बंटवारे की तस्वीर कितनी असमान है? पढ़िए इस रिपोर्ट में।
दुनिया में संपत्ति बढ़ रही है, लेकिन करोड़ों लोगों के जीवन में बुनियादी जरूरतें अब भी पूरी नहीं हो पा रही हैं। वैश्विक गरीबी के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, 82.6 करोड़ से अधिक लोग प्रतिदिन तीन डॉलर से कम पर गुजारा करने को मजबूर हैं। करीब 280 करोड़ लोगों के पास सुरक्षित, सुलभ और पर्याप्त आवास नहीं है, जबकि लगभग 380 करोड़ बीमारी, बेरोजगारी और वृद्धावस्था में सामाजिक सुरक्षा के अभाव से जूझ रहे हैं। वर्ल्ड इनइक्वैलिटी लैब की रिपोर्टों के अनुसार दुनिया के 10% सबसे अमीरों के 75% संपत्ति है, जबकि आधी आबादी के पास महज 2% संपत्ति है।
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वैश्विक आय में सिर्फ 10% हिस्सा
रिपोर्ट के मुताबिक, आय का वितरण बेहद असमान है। दुनिया की शीर्ष 10% आबादी को कुल वैश्विक आय का आधे से अधिक हिस्सा मिलता है, जबकि निचली आधी आबादी की हिस्सेदारी 10 फीसदी से भी कम है। सबसे धनी 0.001 फीसदी यानी 60 हजार से भी कम लोग वैश्विक संपत्ति के छह फीसदी से अधिक हिस्से पर नियंत्रण रखते हैं।
भारत की तस्वीर भी अच्छी नहीं
भारत के शीर्ष 1% लोगों के पास राष्ट्रीय संपत्ति का करीब 40% और शीर्ष 10% के पास करीब 65% हिस्सा है। हालांकि, अलग-अलग रिपोर्टों में संपत्ति की परिभाषा, आकलन पद्धति के कारण तस्वीर एकदम स्पष्ट नहीं कही जा सकती।
अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन के आंकड़ों के अनुसार, 2025 में 28.4 करोड़ कामगार अत्यंत गरीबी में जी रहे थे। यह रोजगार प्राप्त लोगों का लगभग 7.9 फीसदी था। इससे पता चलता है कि केवल काम मिल जाना गरीबी से बाहर निकलने की गारंटी नहीं है।