हफ्ते भर के भीतर भारत को झटका देने वाली दूसरी खबर ग्लोबल हंगर इंडेक्स (वैश्विक भूख सूचकांक) रिपोर्ट- 2020 के रूप में सामने आई है। इस सूचकांक में दक्षिण एशिया में अफगानिस्तान को छोड़कर बाकी सभी देश भारत से ऊपर के पायदान पर बताए गए। इसके पहले अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) की विश्व आर्थिक नजरिये की रिपोर्ट में कहा गया था कि इस वित्त वर्ष के आखिर तक प्रति व्यक्ति जीडीपी के मामले में बांग्लादेश भारत से आगे निकल जाएगा। गौरतलब है कि छह साल पहले भारत की प्रति व्यक्ति जीडीपी बांग्लादेश से 25 फीसदी ज्यादा थी।
हंगर इंडेक्स में भारत 94वें स्थान पर आया है। अफगानिस्तान का दर्जा 97वां है। अपने आस-पास के बाकी देशों में पाकिस्तान 88वें, म्यांमार 78वें, बांग्लादेश 75वें, नेपाल 73वें और श्रीलंका 64वें स्थान पर है। मानव विकास के तमाम सूचकांकों पर इस क्षेत्र में श्रीलंका काफी समय से सबसे ऊपर बना हुआ है। मगर हाल के वर्षों में बांग्लादेश की प्रगति जरूर ऐसी है, जिससे भारत के पिछड़ने का संकेत मिलता है। हंगर इंडेक्स पर बांग्लादेश का अंक साल 2000 में 34.1 था, जो अब 20.4 हो गया है। भारत इस दौरान 38.9 से चलते हुए 27.2 तक ही पहुंच पाया है। इस दौर में पाकिस्तान 37.2 से 24.6 अंक तक पहुंच गया है। इस इंडेक्स पर जितने कम अंक हों, दर्जा उतना ऊपर होता है। तो यह गौर करने की बात है कि आखिर बांग्लादेश ने अपेक्षाकृत ज्यादा प्रगति कैसे की?
ताजा हंगर इंडेक्स रिपोर्ट में बांग्लादेश के बारे में एक खास केस स्टडी को शामिल किया गया है। इस अध्ययन के मुताबिक ‘बांग्लादेश को भूख घटाने में मिली सफलता का कारण घरेलू धन में वृद्धि, के साथ-साथ वहां अपनाई गईं आर्थिक विकास की जन-उन्मुख नीतियां हैं। माता-पिता के शिक्षण, स्वास्थ्य, स्वच्छता और जनसंख्या संबंधी पहलुओं का इसमें योगदान है।’ दरअसल, ग्लोबल हंगर इंडेक्स तैयार करने वाले विशेषज्ञों ने ये आम राय जताई है कि आर्थिक विकास और पोषण को बढ़ावा देने वाले क्षेत्रों में कदम उठा भूख घटाने में सफलता पाई जा सकती है। उनके मुताबिक शिक्षा, स्वच्छता और स्वास्थ्य पोषण से संबंधित क्षेत्र हैं।
यह गौरतलब है कि अब तक बांग्लादेश की प्रति व्यक्ति जीडीपी भारत से कम रही है। ताजा रिपोर्ट 2018 तक के आंकड़ों पर आधारित है। इसका मतलब यह है कि बांग्लादेश ने भूख घटाने में अपेक्षाकृत ज्यादा कामयाबी भारत से कम प्रति व्यक्ति जीडीपी के साथ हासिल की है। ग्लोबल हंगर इंडेक्स कंसर्न वर्ल्डवाइड और वेल्टहंगरहिल्फ नामक स्वयंसेवी संस्थाएं तैयार करती हैं।
ताजा रिपोर्ट में प्राप्त अंकों के आधार पर भारत को गंभीर श्रेणी में रखा गया है। बांग्लादेश भी इसी श्रेणी में है, लेकिन वह थोड़ी प्रगति करके साधारण गंभीर में जा सकता है। नेपाल और श्रीलंका पहले ही इस अगली श्रेणी में पहुंच चुके हैं। भारत के लिए अधिक गंभीर चिंता का विषय आर्थिक विकास में आई तेज गिरावट है। आईएमएफ के मुताबिक भारत उन देशों में है, जहां इस वर्ष अर्थव्यवस्था सबसे ज्यादा सिकुड़ेगी। इसका परिणाम जन कल्याण कार्यों पर खर्च में कटौती के रूप में सामने आएगा। उस हाल में भूख और मानव विकास के तमाम दूसरे संकेतकों पर भारत की स्थिति और बदतर हो सकती है।