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Supreme Court: 'छह हफ्ते में दें जवाब...वरना जुर्माना', खनन पर चार राज्यों को सुप्रीम कोर्ट की चेतावनी

Wed, 17 Jul 2024 06:35 AM IST
निर्मल कांत अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।

सार

Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने अवैत रेत खनन के मामलों की जांच को लेकर कहा कि यदि राज्य छह हफ्ते में जवाबी हलफनामा दाखिल नहीं करते हैं, तो उन पर 20 हजार रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस संजय कुमार की पीठ ने मामले को नवंबर में सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया। 
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सुप्रीम कोर्ट (फाइल) - फोटो : एएनआई
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विस्तार
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सुप्रीम कोर्ट ने अवैध रेत खनन मामलों की जांच और इसमें शामिल संस्थाओं के पट्टे समाप्त करने के अनुरोध वाली याचिका पर मंगलवार को तमिलनाडु, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश से छह हफ्ते के भीतर जवाब मांगा। 

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जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस संजय कुमार की पीठ ने कहा कि यदि राज्य छह हफ्ते में जवाबी हलफनामा दाखिल नहीं करते हैं तो उन पर 20,000 रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। पीठ ने मामले को नवंबर में सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया। याचिकाकर्ता एम. अलगरसामी की ओर से पेश अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने कहा कि याचिका 2018 की है। उन्होंने कहा कि इन चार राज्यों ने नोटिस जारी किए जाने के बावजूद अवैध रेत खनन की स्थिति पर हलफनामा दाखिल नहीं किया है। भूषण ने कहा कि बड़े पैमाने पर अवैध रेत खनन जारी है, जिससे पर्यावरण को नुकसान हो रहा है और अब तक केवल पंजाब सरकार ने ही अपना जवाब दाखिल किया है। उन्होंने कहा कि याचिकाकर्ता ने तमिलनाडु के बारे में मामले पर एक संक्षिप्त नोट दाखिल किया है और राज्य को इस पर जवाब देना चाहिए। दलीलों पर गौर करने के बाद पीठ ने तमिलनाडु से संक्षिप्त नोट पर जवाब देने को कहा।

शीर्ष अदालत ने 2019 में केंद्र सीबीआई से भी मांगा था जवाब
शीर्ष अदालत ने 24 जनवरी, 2019 को नोटिस जारी कर केंद्र, सीबीआई और पांच राज्यों को याचिका पर जवाब देने का निर्देश दिया था। याचिका में देश भर में नदियों और समुद्र तटों पर होने वाले अवैध रेत खनन के मुद्दे को उठाया गया है और आरोप लगाया गया है कि इससे ‘पर्यावरणीय क्षति’ हुई है तथा संबंधित प्राधिकारियों ने अनिवार्य पर्यावरणीय योजना और मंजूरी के बिना संस्थाओं को काम करने की अनुमति दी है।

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