फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

पाक उच्चायुक्त बोले, अगर कश्मीरी भारत के साथ खुश हैं तो वहीं रहें

Sun, 25 Sep 2016 03:38 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
विज्ञापन
बीते रविवार को जम्मू कश्मीर के उड़ी में भारतीय सेना के मिलिट्री बेस पर हुए हमले को लेकर पाकिस्तान ने किसी भी तरह के आरोपों को स्वीकार करने से इंकार कर दिया है। साथ ही दोनों देशों के बीच संबंधों में आई खटास की वजह पड़ोसी देश ने कश्मीर हिंसा और हिजबुल मुजाहिद्दीन के आतंकी बुरहान वानी की मौत को बताया है। 
विज्ञापन


अंग्रेजी अखबार द टेलिग्राफ को दिए इंटरव्यू में पाकिस्तानी उच्चायुक्त अब्दुल बासित ने कहा कि पठानकोट की घटना के बाद भी हम सही ट्रैक पर थे, लेकिन 8 जुलाई (इसी दिन बुरहान वानी मारा गया) की घटना हो गई। इसके बाद सबको पता है कि कश्मीर में क्या हुआ। पूरी बातचीत पटरी से उतर गई। 

बासित बोले, 'हमारी इच्छा किसी की जमीन पर कब्जा करने की नहीं है। हमारा कहना है कि जम्मू-कश्मीर के लोगों को अपना भविष्य तय करने के लिए एक मौका मिलना चाहिए। अगर उन लोगों को विश्वास है कि वे भारत के साथ खुश हैं और उससे जुड़ा महसूस करते हैं तो वैसे ही रहें। पाकिस्तान को इससे कोई समस्या नहीं है, लेकिन कश्मीर को अपना भविष्य तय करने का अधिकार है। कश्मीर महज एक क्षेत्र भर नहीं है, यह किसी क्षेत्र को लेकर विवाद भी नहीं है। यह 1 करोड़ 20 लाख लोगों की जिंदगी का सवाल है। 
विज्ञापन


भारत और पाकिस्तान के मौजूदा संबंधों पर बासित ने कहा, 'हम कठिन हालात में खड़े हैं, लेकिन हम जंग के बारे में नहीं सोच रहे हैं। जंग हल नहीं है, इससे और बहुत सारी समस्याएं पैदा होती हैं। हमें अपनी बातचीत पर जंगोन्माद को हावी नहीं होने देना चाहिए। हमें और ज्यादा परिपक्व होना होगा। हम कुछ समय तक शायद बातचीत न करें, लेकिन हमारी कई समस्याओं का हल बातचीत और शांतिपूर्ण तरीकों से ही निकलना है। मुझे उम्मीद है कि हम कूटनीतिक तरीके से इसके लिए जमीन तैयार करेंगे। मैं एक डिप्लोमेट हूं और आशावादी भी। मुझे उम्मीद है कि डिप्लोमेसी की जीत होगी।'

'रिश्ते जुमलेबाजी से नहीं चलते'

- फोटो : amar ujala
उड़ी हमले के बाद यूएन में भारत की ओर से पाकिस्तान को आतंकी देश कहे जाने को बासित ने ज्यादा तरजीह न देते हुए 'जुमलेबाजी' करार दिया। उन्होंने कहा कि उनकी ओर से भी ऐसे रोचक शब्दों का प्रयोग किया जा सकता है, लेकिन इससे कोई मकसद हल नहीं होता। बासित ने कहा कि दो देशों के बीच रिश्ते जुमलेबाजी से नहीं चलते।  

दिल्ली में तैनात पाकिस्तानी उच्चायुक्त उड़ी हमले और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान की ओर से कश्मीर का मुद्दा उठाए जाने के बाद पहली बार अपनी बात रख रहे थे। उड़ी हमले में भारतीय सेना के 18 जवान शहीद हुए, जबकि 20 घायल हैं।
विज्ञापन

आग उगलते भाषणों से तय नहीं होती नीतियां

- फोटो : File
उड़ी हमले में पाकिस्तान का हाथ होने से अब्दुल बासित ने साफ इनकार कर दिया और कहा कि इससे पाकिस्तान का कोई लेना देना नहीं है। 'पाकिस्तान हाफिज सईद और हिज्बुल मुजाहिद्दीन के सैयद सलाहुद्दीन को भारत के खिलाफ आग उगलने के लिए अपनी जमीन का इस्तेमाल क्यों करने देता है' के सवाल पर बासित ने कहा कि इस तरह की आवाजें भारत की ओर से भी उठती हैं। दोनों देशों की नीतियां किसी के आग उगलते भाषणों से तय नहीं होती हैं।

भारतीय सेना की ओर से उड़ी हमले के बाद पाकिस्तान की सीमा में घुसकर 20 आतंकियों को मारने की खबरों के सवाल पर अब्दुल बासित ने जानकारी होने से इनकार किया। उन्होंने कहा, 'मुझे ऐसी किसी घटना के बारे में पता नहीं है। मुझे नहीं लगता कि ऐसी कोई घटना हुई होगी। मैं यह कहना चाहता हूं कि पाकिस्तान अपनी रक्षा करने में पूरी तरह सक्षम है, लेकिन मैं ऐसी चीजों को बढ़ाना पसंद नहीं करूंगा।'
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें