गंगा की सफाई पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल का सख्त रवैया कायम है। एनजीटी ने केंद्र और उत्तर प्रदेश के प्राधिकरणों को फटकार लगाते हुए हरिद्वार से उन्नाव तक गंगा से जुड़ने वाले 30 नालों का विस्तृत ब्योरा मांगा है। इन 30 नालों में 27 ऐसे हैं, जिनसे घरेलू और औद्योगिक अपशिष्ट बिना शोधन के सीधे गंगा में गिरते हैं। वहीं पीठ ने राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (एनएमसीजी) से सख्त लहजे में कहा है कि वह अगले आदेश तक गंगा के लिए कोई नई परियोजना शुरू न करे। इस पर अगली सुनवाई मंगलवार को होगी।
जस्टिस स्वतंत्र कुमार की अध्यक्षता वाली पीठ ने बृहस्पतिवार को एमसी मेहता मामले पर सुनवाई की। पीठ ने जल संसाधन मंत्रालय, उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, यूपी जल निगम, एनएमसीजी को निर्देश देकर कहा कि सभी प्राधिकरण बैठक कर एनजीटी के जरिये मांगी गई जानकारी का जवाब अगली सुनवाई में दें।
पीठ ने इन प्राधिकरणों से पूछा है कि गंगा से सीधे जुड़े इन 27 नालों में अपशिष्ट की मात्रा और उसकी गुणवत्ता क्या है? इसके अलावा अपशिष्ट सीधे गंगा में जाने से रोकने के लिए एसटीपी की तैयारियों पर भी पीठ ने प्राधिकरणों से जवाब मांगा है।