अगर कड़ी जिद न की होती तो इंटरनेट साथी के तौर पर काम कर रही गीता राणा का भी बाल विवाह हो गया होता। जब उसके समझाने पर माता-पिता न माने तो गीता ने अपने धोधपुर मोतीपुर गांव के प्रधान से अपने अभिभावकों को समझवाने की कोशिश की। और यह तरकीब काम कर गई।
श्रावस्ती के सिरसिया ब्लॉक के धोधपुर मोतीपुर गांव के प्रधान के समझाने पर भी शुरू में तो माता-पिता ने आर्थिक हालात का ही रोना रोया। तब प्रधान ने कहा कि लड़की को अभी पढ़ने दो और इसकी पढ़ाई का खर्चा मैं उठा लूंगा। बेटी पढ़ जायेगी तो इसकी शादी अच्छे घर में हो सकेगी। हुआ भी ऐसा ही। गीता की सास खुद आंगनबाड़ी कार्यकर्ता हैं और उसका पति भी समझदारी के साथ हर किस्म का सहयोग करता है। इंटरनेट साथी के तौर पर काम कर रही गीता ने अपनी यह वीडियो कथा खुद ही तैयार की है।
अमर उजाला फाउंडेशन, यूनिसेफ, फ्रेंड, फिया फाउंडेशन और जे.एम.सी. के साझा अभियान स्मार्ट बेटियां के तहत श्रावस्ती और बलरामपुर जिले की 150 किशोरियों-लड़कियों को अपने मोबाइल फोन से बाल विवाह के खिलाफ काम करने वालों की ऐसी ही सच्ची और प्रेरक कहानियां बनाने का संक्षिप्त प्रशिक्षण दिया गया है। इन स्मार्ट बेटियों की भेजी कहानियों को ही हम यहां आपके सामने पेश कर रहे हैं।