गीता हार्वर्ड के इतिहास की तीसरी ऐसी महिला प्रोफेसर हैं जो इस पद पर रहने के दौरान आईएमएफ की मुख्य अर्थशास्त्री बनी हैं। इससे पहले भारतवंशी और नोबेल पुरस्कार विजेता अमर्त्य सेन भी इस पद पर रहते हुए आईएमएफ के मुख्य अर्थशास्त्री बने थे।
40 से ज्यादा शोध पत्र लिख चुकी हैं गीता गोपीनाथ
गीता साल 2001 से 2005 तक शिकागो यूनिवर्सिटी में असिस्टेंट प्रोफेसर थीं। इसके बाद साल 2005 में हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में असिस्टेंट प्रोफेसर के तौर पर उनकी नियुक्ति हुई। साल 2010 में गीता इसी यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर बनीं और फिर 2015 में वे इंटरनेशनल स्टडीज ऑफ इकोनॉमिक्स की प्रोफेसर बन गईं। गोपीनाथ 40 से ज्यादा शोध पत्र लिख चुकी हैं, इनमें विनिमय दरें, व्यापार और निवेश, अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संकट, मौद्रिक नीति, कर्ज और और उभरते बाजारों के संकट पर आधारित शोध शामिल हैं।
गीता ने दिल्ली विश्वविद्यालय से बीए और दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स और यूनिवर्सिटी ऑफ वाशिंगटन से एमए की डिग्री हासिल की है। उसके बाद उन्होंने अर्थशास्त्र में पीएचडी की डिग्री प्रिंसटन विश्विद्यालय से 2001 में प्राप्त की। इसके बाद उसी साल उन्होंने शिकागो विश्वविद्यालय में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर काम शुरू कर दिया, वर्ष 2005 से वह हार्वर्ड विश्वविद्यालय में पढ़ा रही हैं।
आईएमएफ के एक बयान के अनुसार गोपीनाथ मारीस ओब्स्टफील्ड का स्थान लेंगी। ओब्स्टफील्ड 2018 के अंत में सेवानिवृत्त होंगे। आईएमएफ की प्रबंध निदेशक क्रिस्टीन लेगार्ड ने कहा कि गोपीनाथ दुनिया की बेहतरीन अर्थशास्त्रियों में से एक हैं, उनके पास उम्दा शैक्षणिक योग्यता के साथ व्यापक अंतरराष्ट्रीय अनुभव भी है।