गुजरात के गिर क्षेत्र में संदिग्ध बेबेसिया संक्रमण के चलते आठ शेर शावकों की मौत ने वन विभाग की चिंता बढ़ा दी है। संक्रमण रोकने के लिए प्रभावित क्षेत्रों में शेरों को आइसोलेट किया गया है और किलनी खत्म करने का अभियान शुरू हुआ है। नमूनों को जांच के लिए गुजरात बायोटेक रिसर्च सेंटर भेजा गया है। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने मामले की समीक्षा की है और वन विभाग को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं।
गुजरात के प्रसिद्ध गिर क्षेत्र में शेरों के बीच संदिग्ध संक्रमण फैलने की आशंका ने वन विभाग की चिंता बढ़ा दी है। गिर सोमनाथ और अमरेली जिलों में आठ शेर शावकों की मौत के बाद राज्य सरकार और वन विभाग अलर्ट मोड पर आ गए हैं। शुरुआती जांच में बेबेसिया संक्रमण की आशंका जताई जा रही है, जो किलनी के जरिए जानवरों में फैलता है। वन मंत्री अर्जुन मोढवाडिया ने कहा कि संक्रमण को रोकने के लिए प्रभावित इलाकों के आसपास विशेष निगरानी शुरू कर दी गई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने भी उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की है।
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क्या है बेबेसिया संक्रमण और कैसे फैलता है?
बेबेसिया एक परजीवी संक्रमण है, जो मुख्य रूप से किलनी के काटने से फैलता है। इस बीमारी से जानवरों में कमजोरी, बुखार, खांसी और सुस्ती जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। कई मामलों में यह संक्रमण जानलेवा भी साबित हो सकता है। वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, जिन शावकों की मौत हुई है, उनमें इसी तरह के लक्षण देखे गए थे। हालांकि अंतिम पुष्टि लैब रिपोर्ट आने के बाद ही होगी। इसके लिए नमूनों को गुजरात बायोटेक रिसर्च सेंटर भेजा गया है और तीन से चार दिनों में रिपोर्ट आने की उम्मीद है।
क्या वन विभाग ने बचाव के लिए बड़े कदम उठाए हैं?
संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए वन विभाग ने प्रभावित क्षेत्रों के 10 किलोमीटर दायरे में रहने वाले शेरों को अलग करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। साथ ही किलनियों को खत्म करने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। पशु चिकित्सकों की कई टीमें लगातार क्षेत्र में निगरानी कर रही हैं। बीमार और कमजोर शेरों की पहचान कर उनका इलाज भी शुरू किया गया है। वन विभाग ने आसपास के गांवों और राजस्व क्षेत्रों में भी सतर्कता बढ़ा दी है।
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क्या गिर अभयारण्य के बाहर बढ़ा खतरा?
वन मंत्री अर्जुन मोढवाडिया ने बताया कि शावकों की मौत गिर अभयारण्य के बाहर राजस्व क्षेत्रों में हुई है। इससे यह चिंता बढ़ गई है कि संक्रमण जंगल के बाहर के इलाकों में तेजी से फैल सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि खुले क्षेत्रों में रहने वाले जानवरों में किलनी संक्रमण का खतरा ज्यादा रहता है। इसलिए वन विभाग अब जंगल से बाहर के क्षेत्रों में भी विशेष निगरानी कर रहा है।
क्या एशियाई शेरों की सुरक्षा पर बड़ा सवाल खड़ा हुआ?
गुजरात एशियाई शेरों का एकमात्र प्राकृतिक घर माना जाता है। पिछले साल हुई गणना के अनुसार राज्य में 891 एशियाई शेर मौजूद हैं। ऐसे में एक साथ आठ शावकों की मौत ने वन्यजीव संरक्षण को लेकर चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर संक्रमण समय रहते नहीं रोका गया तो यह दूसरे शेरों तक भी फैल सकता है। इसी कारण सरकार ने मामले को गंभीरता से लेते हुए त्वरित कार्रवाई शुरू की है।