तृणमूल कांग्रेस से अलग होने के कुछ महीनों बाद, गुजरात सरकार ने वडोदरा में लंबे समय से विवादित एक म्युनिसिपल प्लॉट को पूर्व क्रिकेटर यूसुफ पठान को सौंपने का प्रस्ताव रखा है। इस प्रस्ताव के तहत, 500 वर्ग मीटर जमीन उन्हें 'उपहार' के तौर पर दी जाएगी, जबकि बाकी जमीन रियायती दर पर उपलब्ध कराई जाएगी।
एजेंडे में क्या है?
सोमवार को जारी एजेंडे के अनुसार, वडोदरा म्युनिसिपल कमिश्नर की ओर से पेश किया गया यह प्रस्ताव 23 अक्तूबर को भाजपा शासित नगर निकाय की स्थायी समिति (स्टैंडिंग कमिटी) के सामने अंतिम मंजूरी के लिए रखा जाएगा।
टीएमसी से कब अलग हुए?
यह प्रस्ताव उस घटना के लगभग चार महीने बाद आया है, जब 2024 में पश्चिम बंगाल के बहरामपुर से चुने गए यूसुफ पठान, ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट से अलग होने वाले 20 टीएमसी सांसदों के समूह में शामिल हो गए थे। इन सांसदों ने बाद में एनसीपीआई (नेशनलिस्ट सिटीजन्स पार्टी ऑफ इंडिया) का गठन किया और संसद में एनडीए खेमे में शामिल हो गए।
पठान 2012 से ही वडोदरा के तंडलजा इलाके में अपने पारिवारिक घर के बगल में स्थित 978 वर्ग मीटर के आवासीय प्लॉट को हासिल करने की कोशिश कर रहे थे। हालांकि, इस दौरान उन्हें कई वर्षों तक कानूनी अड़चनों और नगर निकाय की ओर से अतिक्रमण संबंधी नोटिसों का सामना करना पड़ा।
कितना वर्ग मीटर जमीन मिला उपहार में?
नए प्रस्ताव के अनुसार, वडोदरा म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (वीएमसी) की 500 वर्ग मीटर जमीन पठान को 'उपहार' में दी जाएगी। बाकी बची 478 वर्ग मीटर जमीन 45 प्रतिशत की छूट पर दी जाएगी, जिसकी कीमत 'वडोदरा अर्बन डेवलपमेंट अथॉरिटी' (VUDA) की मूल्यांकन समिति द्वारा तय की गई दर का 55 प्रतिशत होगी।
गुजरात सरकार ने बिक्री से कब खारिज की?
प्रस्ताव में कहा गया है कि यह आवंटन राज्य के 'शहरी विकास और शहरी आवास विभाग' द्वारा 2024 में जारी एक प्रस्ताव के तहत, 'कुछ विशेष नियमों और शर्तों" के अधीन किया जाएगा। यह प्लॉट क्रिकेटर से राजनेता बने यूसुफ पठान और नगर निकाय के बीच एक दशक से चल रहे विवाद का केंद्र रहा है। 2012 में, पठान ने अपने घर से सटी इस जमीन को खरीदने का अनुरोध किया था। हालांकि वीएमसी शुरू में सहमत हो गई थी, लेकिन गुजरात सरकार ने 2014 में इस बिक्री को खारिज कर दिया।
पठान ने गुजरात हाईकोर्ट का रूख क्या किया?
2024 में, जब पठान पश्चिम बंगाल के बहरामपुर से टीएमसी के टिकट पर लोकसभा के लिए चुने गए, तो नगर निकाय ने उन्हें एक नोटिस जारी किया। इसमें उनसे कथित अतिक्रमण हटाने और वीएमसी की जमीन खाली करने के लिए कहा गया था। पठान ने गुजरात हाई कोर्ट में इस नोटिस को चुनौती दी। उन्होंने तर्क दिया कि यह मामला एक दशक से भी पुराना है और कथित अतिक्रमण हटाने के लिए कहने से पहले नगर निकाय को 'कारण बताओ नोटिस' जारी करना चाहिए था।
उन्होंने यह भी कहा कि यह जमीन नगर निगम की है, न कि राज्य सरकार की। इसके बाद हाईकोर्ट ने प्लॉट आवंटन के उनके अनुरोध को खारिज करने के राज्य सरकार के फैसले को बरकरार रखा। पठान ने इस आदेश को एक डिवीजन बेंच के सामने चुनौती दी, लेकिन इस साल अगस्त में, उनके वकील की ओर से अदालत को यह बताए जाने के बाद कि वे राज्य सरकार की नीति के तहत अपना दावा आगे बढ़ा रहे हैं, इस अपील को वापस ले लिया गया और खारिज कर दिया गया।
अगर स्टैंडिंग कमिटी इस नए प्रस्ताव को मंजूरी दे देती है, तो नगर आयुक्त द्वारा तय की गई शर्तों के तहत विवादित प्लॉट के आवंटन का रास्ता साफ हो जाएगा।