राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग ने कहा है कि अयोध्या मसले पर पुनर्विचार याचिका दायर करना मुसलमानों के हित में नहीं होगा। आयोग के अध्यक्ष गेयरुल हसन रिजवी ने रविवार को कहा कि इससे हिंदू-मुस्लिम एकता को नुकसान पहुंचेगा।
रिजवी ने इस बात पर हैरानी जताई कि जब मुस्लिम पक्षकार कह रहे हैं कि यह याचिका सौ फीसदी खारिज होगी, तब इसे दायर करने का क्या औचित्य है। भारत का आम मुसलमान पुनर्विचार याचिका के पक्ष में नहीं है, क्योंकि वह नहीं चाहता कि जो मसला हल हो गया है, उसे फिर से उठाया जाए।
इसलिए सवाल उठता है कि आप किसके लिए यह याचिका दायर करना चाहते हैं। केवल लॉ बोर्ड के चार-पांच सदस्य और असदुद्दीन ओवैसी रिव्यू पिटीशन के पक्ष में हैं। ओवैसी वोट के लिए मुस्लिमों का इस्तेमाल कर राजनीति कर रहे हैं।