पूर्व रक्षा मंत्री जॉर्ज फर्नांडिस को साल 1960 के दशक में मुंबई का बेताज बादशाह कहा जाता था। उस वक्त मुंबई के औद्योगिक क्षेत्र, नगर निकायों और छोटे कारोबार में श्रमिकों का बोलबाला था। उनके एक इशारे पर मुंबई बंद हो जाती थी। इसलिए तब उन्हें बंद सम्राट भी कहा जाता था। जॉर्ज को मुंबई से ही राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति मिली थी। पहली बार वह उस वक्त चर्चा में आए, जब उन्होंने 1967 के संसदीय चुनाव में कांग्रेस के दिग्गज नेता एसके पाटिल को हराया था।
प्रख्यात समाजवादी नेता के मुंबई से जुड़ाव को याद करते हुए भाजपा नेता प्रकाश रेड्डी ने कहा कि फर्नांडिस ने 1967 में पाटिल को शिकस्त देकर सियासी दिग्गजों को चौंका दिया था। रेड्डी ने बताया कि फर्नांडिस बृहन्मुंबई विद्युत आपूर्ति एवं परिवहन (बेस्ट) के कामगारों व गुमास्ता वर्करों के लिए खड़े हुए, उनके अधिकारों की लड़ाई लड़ी। उन्होंने श्रमिक वर्ग में 1960 के दशक में अपनी जगह बनाई।
रेड्डी ने बताया कि जॉर्ज ने 1967 का लोकसभा चुनाव लड़ने से पहले मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) कर्मियों की हड़ताल का सफल नेतृत्व किया था। मधु दंडवते ने प्रजा सोशलिस्ट पार्टी का नेतृत्व किया, वहीं फर्नांडिस ने संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी का नेतृत्व किया। दोनों का विलय कर सोशलिस्ट पार्टी बनाई गई और उसने मुंबई के नगर निकाय चुनाव में 1968 में शिवसेना का समर्थन किया।
सोशलिस्ट पार्टी और शिवसेना के गठबंधन ने उस साल निकाय चुनावों में जीत हासिल की। रेड्डी ने कहा कि जॉर्ज कांग्रेस और इंदिरा गांधी के इतने खिलाफ थे कि उन्होंने अपने समाजवादी सिद्धांतों तक से समझौता कर लिया। फर्नांडिस के शिवसेना के तत्कालीन सुप्रीमो बाल ठाकरे से करीबी संबंध थे।