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लुटियन दिल्ली के ‘मजदूर’ नेता से राजनेता बने जॉर्ज, न घर पर कोई सुरक्षा, न गेट पर दरबान

Wed, 30 Jan 2019 04:33 AM IST
अजय सिंह शरद गुप्ता, नई दिल्ली।
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George Fernandes - फोटो : pti
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पूर्व रक्षा मंत्री जार्ज फर्नांडिस का आज दिल्ली के लोधी रोड स्थित शवदाह गृह में अंतिम संस्कार होगा। उनकी इच्छा के मुताबिक दाह संस्कार के बाद उनकी अस्थियों को दफनाया जाएगा। उनकी करीबी सहयोगी जया जेटली ने यह जानकारी दी।  गौरतलब है कि फर्नांडिस का लंबी बीमारी के बाद मंगलवार सुबह दिल्ली में निधन हो गया। वह 88 वर्ष के थे। 

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समता पार्टी की पूर्व प्रमुख ने कहा कि फर्नांडिस शुरू में चाहते थे कि मृत्यु के बाद उनके पार्थिव शरीर का दाह संस्कार किया जाए लेकिन बाद में उन्होंने दफन किए जाने की भी इच्छा जताई थी।  जेटली ने संवाददाताओं से कहा कि अंतिम संस्कार लोधी रोड स्थित शवदाह गृह में होगा। हम उनकी इच्छानुसार दोनों चीजें करेंगे। पार्थिव शरीर का दाह संस्कार किया जाएगा और उसके बाद अस्थियों को दफना कर उनकी दोनों इच्छाओं को पूरा किया जाएगा। 


 न घर पर कोई सुरक्षा, न गेट पर दरबान

लुटियन दिल्ली का वह अकेला बंगला था, जिसके गेट पर कोई सुरक्षाकर्मी नहीं रहता था। कृष्ण मेनन मार्ग स्थित तत्कालीन रक्षामंत्री जॉर्ज फर्नांडिस के बंगले का गेट चौबीस घंटे खुला रहता था। यहां तक कि घर के अंदर भी कोई सरकारी सेवक नहीं था। केवल दो निजी सहायक थे, जो आगंतुकों को चाय-पानी कराते थे। कई बार ऐसा हुआ, ‘मैं उनके घर में मेन गेट से घुसा और सभी कमरों में उनको तलाश करता हुआ पिछले दरवाजे से बाहर निकल आया।’

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ऐसा नहीं था कि बंगला सुनसान रहता। जॉर्ज इतने लोकप्रिय थे कि उनके घर के बरामदे में हर समय कुछ लोग बैठे ही रहते थे और रसोई में हर समय चाय बनती रहती थी। वह मूलत: एक्टिविस्ट थे, राजनेता बाद में। यही वजह थी कि बतौर केंद्रीय मंत्री उनका सरकारी बंगला म्यांमार विद्रोहियों का दिल्ली में स्थायी पता था। 

भारत सरकार जहां म्यांमार सरकार से कूटनीतिक रिश्ते सुधार रही होती, वहीं उसके वरिष्ठ मंत्री जॉर्ज वहां की सैन्य सरकार के खिलाफ सशस्त्र संघर्ष कर रहे विद्रोहियों को हर तरह की सहायता दे रहे होते। इन सबके बावजूद तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी उन पर पूरा भरोसा करते थे। वे हर महत्वपूर्ण मामले पर जॉर्ज, जसवंत सिंह और ब्रजेश मिश्र से जरूर मशवरा करते। इसी वजह से जब उन्होंने 1999 में 22 सहयोगी दलों को मिलाकर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) बनाया तो उसके संयोजक की जिम्मेदारी जॉर्ज जॉर्ज फर्नांडिस को दी गई।

मजदूर आंदोलनों से आगे बढ़कर उन्होंने राम मनोहर लोहिया के संपर्क में आकर राजनीति में प्रवेश किया। इसलिए वह आजीवन समाजवादी रहे। भाजपा के साथ होने के बावजूद उन्होंने समाजवादी विचारधारा से समझौता नहीं किया। 1979 में जितने सशक्त तरीके से उन्होंने जनसंघ (वर्तमान भाजपा) का विरोध कर मोरारजी देसाई सरकार छोड़कर जाने पर विवश कर दिया, भाजपा के साथ आने पर उन्होंने उतनी ही ताकत से उसका बचाव भी किया, संसद के अंदर और बाहर भी।

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सियाचिन जाने वाले पहले रक्षामंत्री थे

George Fernandes - फोटो : pti
बतौर रक्षामंत्री जॉर्ज सियाचिन पहुंचने वाले पहले रक्षामंत्री थे। अपने पांच वर्ष के कार्यकाल में उन्होंने 30 बार से ज्यादा सियाचिन की यात्रा की। उन्होंने न सिर्फ सैनिकों की समस्याएं समझीं, बल्कि उन्हें दूर करने के भी प्रयास किए। उनके नेतृत्व में ही सेना ने कारगिल की लड़ाई जीती।
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