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'हर साल 1100 बार चीन से होता है सामना': जनरल द्विवेदी ने बताया कितनी बदली सैन्य रणनीति, अग्निपथ पर क्या कहा?

Tue, 30 Jun 2026 12:39 PM IST
हिमांशु सिंह चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दल्ली

सार

General Upendra Dwivedi: निवर्तमान सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने कहा है कि भारत और चीन की सेनाओं के बीच हर साल 1100 से अधिक जमीनी स्तर की बातचीत होती है, जिससे सीमा पर शांति बनाए रखने में मदद मिलती है। उन्होंने एलएसी की स्थिति को स्थिर लेकिन संवेदनशील बताया। जनरल द्विवेदी ने ऑपरेशन सिंदूर को सेना की सबसे बड़ी उपलब्धि बताते हुए कहा कि भारतीय सेना भविष्य के तकनीक आधारित युद्धों के लिए तेजी से खुद को तैयार कर रही है। इतना ही नहीं अग्निपथ और सेना की रणनीति पर भी उन्होने कई बाते कहीं। आइए, विस्तार से जानते हैं...
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जनरल उपेंद्र द्विवेदी - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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भारत और चीन के बीच पूर्वी लद्दाख में तनाव के बाद वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर हालात भले ही पहले से स्थिर हुए हों, लेकिन भारतीय सेना अभी भी पूरी तरह सतर्क है। निवर्तमान सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने खुलासा किया है कि भारत और चीन की सेनाओं के बीच हर साल 1100 से अधिक जमीनी स्तर की बातचीत होती है, ताकि सीमा पर किसी भी तरह की गलतफहमी से बचा जा सके। उन्होंने यह भी बताया कि भारतीय सेना तेजी से अपनी सैन्य रणनीति बदल रही है और भविष्य के युद्धों के लिए खुद को तैयार कर रही है।

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जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने अपने कार्यकाल के अनुभव साझा करते हुए कहा कि एलएसी पर शांति बनाए रखने के लिए लगातार सतर्कता, मजबूत सैन्य तैयारी और बातचीत बेहद जरूरी है। उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर को भारतीय सेना की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक बताया और कहा कि इस अभियान ने सेना की संयुक्त, एकीकृत और भविष्य के युद्धों के लिए तैयार क्षमता को साबित किया है। इसके साथ ही उन्होंने अग्निपथ योजना, आत्मनिर्भरता और सेना के आधुनिकीकरण पर भी विस्तार से अपनी बात रखी।
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क्या एलएसी पर भारत-चीन के रिश्तों में सुधार हुआ?

  • जनरल द्विवेदी ने कहा कि 2024-25 के दौरान भारत और चीन के बीच सैन्य और कूटनीतिक स्तर पर कई सकारात्मक घटनाक्रम हुए हैं। उन्होंने बताया कि दोनों देशों के बीच सीमा प्रबंधन, सैन्य वार्ता और संवाद की प्रक्रिया लगातार जारी है। कैलाश मानसरोवर यात्रा की बहाली, सीमा व्यापार को दोबारा शुरू करने पर सहमति और सैन्य वार्ताओं की बढ़ती संख्या से संबंधों में धीरे-धीरे सामान्य स्थिति लौटने के संकेत मिले हैं।
  • उन्होंने कहा कि भारत और चीन की सेनाओं के बीच हर साल 1100 से अधिक जमीनी स्तर की बातचीत होती है। इसके अलावा हॉटलाइन, फ्लैग मीटिंग और कमांडर स्तर की बैठकों के जरिए स्थानीय मुद्दों को सुलझाया जाता है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि एलएसी पर स्थिति स्थिर जरूर है, लेकिन संवेदनशील बनी हुई है और भारतीय सेना किसी भी परिस्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है।

ऑपरेशन सिंदूर ने सैन्य रणनीति को कैसे बदला?

  • जनरल द्विवेदी ने कहा कि हाल के वर्षों में भारतीय सेना की सबसे बड़ी उपलब्धि ऑपरेशन सिंदूर रहा है। उनके अनुसार, इस अभियान ने दिखाया कि भविष्य के युद्ध केवल पारंपरिक हथियारों से नहीं लड़े जाएंगे, बल्कि तकनीक, ड्रोन, साइबर क्षमता और मल्टी-डोमेन ऑपरेशन निर्णायक भूमिका निभाएंगे।
  • उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने सेना की संयुक्त और एकीकृत युद्ध क्षमता को साबित किया। इस दौरान तकनीक, सुरक्षित संचार प्रणाली, सटीक हमले की क्षमता और तीनों सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल का प्रभावी प्रदर्शन देखने को मिला। जनरल द्विवेदी के मुताबिक, सेना अब मल्टी-डोमेन वॉरफेयर की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है।

भारतीय सेना में क्या बड़े बदलाव किए जा रहे?

जनरल द्विवेदी ने बताया कि भारतीय सेना में व्यापक बदलाव किए जा रहे हैं। इसके तहत रुद्र ब्रिगेड, भैरव बटालियन, अशनि ड्रोन प्लाटून, शक्तिबाण रेजिमेंट, दिव्यास्त्र बैटरी और बाज बटालियन जैसी नई सैन्य संरचनाएं तैयार की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि बाज बटालियन का उद्देश्य ड्रोन और रिमोटली पायलटेड एयरक्राफ्ट क्षमता को मजबूत करना है। इन इकाइयों की मदद से निगरानी, खुफिया जानकारी जुटाने और युद्धक्षेत्र की वास्तविक समय में जानकारी हासिल करने की क्षमता बढ़ेगी। सेना का फोकस अब तकनीक आधारित और नेटवर्क से जुड़ी युद्ध प्रणाली पर है।

अग्निपथ योजना पर सेना प्रमुख ने क्या कहा?

  • अग्निपथ योजना भारतीय सेना को अधिक युवा, फिट और भविष्य के युद्धों के लिए तैयार बनाने की दिशा में एक बड़ा सुधार है।
  • अग्निवीरों को लेकर सेना का शुरुआती अनुभव सकारात्मक रहा है।
  • अग्निवीर यूनिट जीवन, सैन्य प्रशिक्षण और फील्ड की आवश्यकताओं के अनुरूप खुद को अच्छी तरह ढाल रहे हैं।
  • आधुनिक युद्ध में ड्रोन, निगरानी प्रणाली, संचार नेटवर्क और नई तकनीकों की भूमिका लगातार बढ़ रही है।
  • युवा अग्निवीर नई तकनीकों को तेजी से अपनाकर सेना की परिचालन क्षमता को मजबूत कर रहे हैं।
  • सेना का मानना है कि तकनीक आधारित युद्ध में अग्निवीर महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
  • अग्निपथ योजना अभी शुरुआती चरण में है और इसका लगातार मूल्यांकन किया जा रहा है।
  • भविष्य में किसी भी बदलाव का निर्णय सेना की परिचालन जरूरतों और जमीनी अनुभव के आधार पर किया जाएगा।

आत्मनिर्भरता को क्यों बताया राष्ट्रीय सुरक्षा की जरूरत?

जनरल द्विवेदी ने कहा कि आत्मनिर्भरता अब केवल एक नीति नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा की बुनियादी आवश्यकता बन चुकी है। उन्होंने कहा कि युद्ध या संकट की स्थिति में देश को अपने हथियारों, गोला-बारूद और सैन्य तकनीक के लिए दूसरों पर निर्भर नहीं रहना चाहिए।उन्होंने कहा कि भारतीय सेना स्वदेशी तकनीकों, ड्रोन, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली, संचार नेटवर्क और एआई आधारित प्रणालियों को तेजी से अपनाने की दिशा में काम कर रही है। डीआरडीओ, निजी उद्योग, स्टार्टअप और शैक्षणिक संस्थानों के साथ मिलकर सेना भविष्य की चुनौतियों के लिए खुद को तैयार कर रही है।

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