दिल्ली पुलिस ने सोमवार को बताया कि किस प्रकार नागरिकता संशोधन अधिनियम के विरोध में शुरू हुआ प्रदर्शन अचानक हिंसात्मक हो गया। पुलिस के मुताबिक रविवार को प्रदर्शनकारियों ने अचानक अपने प्रदर्शन का मार्ग बदला और कुछ बसों में आग लगा दी। इसके बाद स्थानीय नागरिकों में डर की भावना पैदा हुई जिसके बाद पुलिस को कार्रवाई करनी पड़ी। इस मामले में अब तक दो एफआईआर दर्ज की गई हैं। इनमें एक न्यू फ्रेंड्स कॉलॉनी और एक जामिया नगर थाने में दर्ज की गई है। पुलिस ने छात्रों को किसी भी अफवाह से बचने की सलाह दी है।
दिल्ली पुलिस के पीआरओ एमएस रंधावा के मुताबिक रविवार को दोपहर दो बजे से प्रदर्शन शुरू हुआ था। इस प्रदर्शन में छात्रों के अलावा सामान्य लोग भी शामिल थे। जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय से मार्च शुरू होकर सरायजुलाना चौक की तरफ बढ़ा था। इस दौरान पुलिस को उकसाने की कार्रवाई भी हुई थी। पुलिस पर पत्थर, ट्यूबलाइट और बल्ब से हमले किये गये थे।
पुलिस के मुताबिक, अचानक प्रदर्शनकारियों ने अपने मार्च का रास्ता बदल दिया और वे माता मंदिर मार्ग पर आगे बढ़ने लगे। इस दौरान हिंसा की घटनाएं भी होने लगीं। कुछ प्रदर्शनकारियों ने आपपास की जगहों पर पत्थरबाजी शुरू कर दी थी और चार बसों में आग लगा दी। इसके बाद सामान्य लोगों की तरफ से पुलिस को लगातार फोन किया जाने लगा। उसके बाद पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए हल्का बल प्रयोग किया था।
दिल्ली पुलिस ने बताया कि इसके पूर्व शुक्रवार से ही नागरिकता संशोधन अधिनियम 2019 के विरोध में कुछ लोगों ने शुक्रवार को प्रदर्शन किया था। उस समय दिल्ली पुलिस ने पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम किए थे और कोई अप्रिय घटना नहीं घटने पाई थी। इसी प्रकार शनिवार को भी प्रदर्शन हुआ था।
विश्वविद्यालय परिसर में कैसे घुसे
पुलिस पर विश्वविद्यालय प्रशासन की अनुमति के बिना परिसर में घुसने का आरोप भी है। इस पर पुलिस ने अपनी सफाई देते हुए कहा है कि कुछ प्रदर्शनकारी पुलिस पर हमला करने के बाद विश्वविद्यालय परिसर में घुस गए थे। संभावना है कि कुछ पुलिस के जवान उनका पीछा करते हुए परिसर में घुस गए होंगे। हालांकि, यह एक जांच का विषय है। पुलिस ने कहा है कि इस मामले में केवल दोषी लोगों पर ही कार्रवाई होगी, इसलिए किसी भी सामान्य व्यक्ति को इससे डरने की जरूरत नहीं है।