भारत द्वारा लिपुलेख-धारचुला मार्ग तैयार किए जाने पर नेपाल द्वारा आपत्ति किए जाने के सवाल पर जनरल नरवणे ने कहा कि पड़ोसी देश की प्रतिक्रिया हैरान करने वाली थी। सेना प्रमुख ने कहा, 'काली नदी के पूरब की तरफ का हिस्सा उनका है। हमने जो सड़क बनाई है वह नदी के पश्चिमी तरफ है। इसमें कोई विवाद नहीं था। मुझे नहीं पता कि वे किसी चीज के लिये विरोध कर रहे हैं।'
टूर ऑफ ड्यूटी (टीओडी) परिकल्पना के तहत युवाओं को तीन साल के लिये सेना में भर्ती करने के प्रस्ताव के बारे में सेना प्रमुख ने कहा कि यह विचार स्कूल और कॉलेज के छात्रों से मिले उस फीडबैक के बाद सामने आया कि वे सेना में स्थायी कमीशन लिए बिना ही सेना की जिंदगी का अनुभव करना चाहते हैं। जनरल नरवणे ने कहा कि टीओडी से सेना को अपने पेंशन और अन्य दिए जाने वाले फायदों पर आने वाली लागत को कम करने में मदद मिलेगी।
एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि सेना को सरकार की तरफ से आदेश मिला है कि कोविड-19 के मद्देनजर वह चालू वित्त वर्ष में अपने खर्चों में 20 फीसदी की कटौती करे और सेना अपनी युद्ध तैयारियों से समझौता किए बिना इसे लागू कर रही है।
भारत और चीन के सैनिकों के दो मौकों पर आमने-सामने आने के सवाल पर सेना प्रमुख ने कहा कि दोनों मामले आपस में जुड़े नहीं हैं। उन्होंने कहा, 'हम मामले दर मामले के आधार पर इनसे निपट रहे हैं। मैंने इन तनातनी में कोई एक जैसा प्रारूप नहीं देखा।'
दो मोर्चों पर युद्ध की बात पर उन्होंने कहा कि यह एक संभावना है और देश को ऐसे परिदृश्य का सामना करने के लिये तैयार रहना चाहिए। उन्होंने कहा, 'यह एक संभावना है। ऐसा नहीं है कि हर बार ऐसा होने जा रहा है। हमें जो भी आपदाएं, विभिन्न परिदृश्य सामने आ सकते हैं उन्हें लेकर सतर्क रहना होगा।'
जनरल नरवणे ने कहा, 'लेकिन यह मान लेना कि सभी मामलों में दोनों मोर्चे 100 प्रतिशत सक्रिय हो जाएंगे, मुझे लगता है कि यह कल्पना करना सही नहीं होगा। दो मोर्चों पर युद्ध से निपटने की जहां तक बात है तो इसमें हमेशा एक प्राथमिकता वाला मोर्चा होगा और दूसरा कम प्राथमिकता वाला। हम दो मोर्चों पर खतरे से निपटने को इस तरह से देखते हैं।'