लोकसभा चुनाव जीतने के लिए नेताओं ने एड़ी-चोटी का जोर लगा दिया है। चुनाव प्रचार तो चरम पर है ही, लेकिन इसके साथ-साथ नेताजी तंत्र-मंत्र का भी सहारा ले रहे हैं। जानकारों का ऐसा मानना है कि बगलामुखी देवी के जप राजनीति, नौकरशाही और न्याय व्यवस्था में सफलता के लिए बहुत कारगर सिद्ध होते हैं, इसलिए लोकसभा चुनाव में ज्यादातर प्रत्याशी इस देवी के जप करा रहे हैं।
डॉ. लक्ष्मीकांत त्रिपाठी का कहना है कि पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी भी मां बगलामुखी देवी की आराधना करती थीं। वे मध्यप्रदेश के दतिया जिले में स्थित मां पीतांबरा के मंदिर में जाती थीं। उनके अलावा दूसरे कई बड़े नेता भी उस मंदिर में जाते रहे हैं।
माना जाता है कि मां पीतांबरा के मंदिर से कोई पुकार कभी अनसुनी नहीं जाती। इस बार भी वहां राजनेताओं का तांता लगा हुआ है। जिसके पास जैसा समय होता है, नेता मंदिर में पहुंच जाते हैं। ऐसा कहा जाता है कि मां बगुलामुखी ही पीतांबरा देवी हैं, इसलिए उन्हें पीली वस्तुएं चढ़ाई जाती हैं।
मां को प्रसन्न करना इतना आसान भी नहीं है। भक्तगणों को इसके लिए विशेष अनुष्ठान करना पड़ता है। इस दौरान भक्त को पीले कपड़े पहनने होते हैं और मां के चरणों में भी पीली वस्तुएं चढ़ाई जाती हैं। मां पीतांबरा को राजसत्ता की देवी माना जाता है। इसी रूप में भक्त उनकी आराधना करते हैं। हिमाचल प्रदेश में कांगड़ा जनपद के कोटला कस्बे में भी बगलामुखी मंदिर है। इसे भी प्रसिद्ध शक्तिपीठ माना गया है।