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लद्दाख की मांगों को लेकर आर-पार की तैयारी?: एलएबी की सरकार के साथ बैठक, बातचीत से पहले आंदोलन की दी चेतावनी

Sat, 05 Sep 2026 12:08 PM IST
अस्मिता त्रिपाठी पीटीआई, नई दिल्ली
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चेरिंग दोरजे लकरूक, एलएबी के चेयरमैन - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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दिल्ली में 9 सितंबर को गृह मंत्रालय (एमएचए) के साथ होने वाली सब-कमेटी की बैठक से पहले लेह एपेक्स बॉडी (एलएबी) ने चेतावनी दी है। एलएबी ने कहा है कि अगर सरकार उनकी मुख्य मांगों पर ठोस प्रगति करने में नाकाम रहती है, तो वे अपना आंदोलन और तेज कर देंगे।

 संगठन का क्या मांग है? 

  •  लद्दाख के लिए केंद्र शासित प्रदेश के स्तर पर कानून बनाने. अनुच्छेद 371 के तहत सुरक्षा उपाय। 
  • पिछले साल 24 सितंबर को हुई हिंसा के बाद दर्ज मामलों को वापस लेने, पीड़ितों को मुआवजा देने और जांच आयोग की रिपोर्ट को सार्वजनिक करने की मांग कर रहा है।

दरअसल,  अगस्त 2019 में लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा मिलने के बाद से एलएबी और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस (केडीए) मिलकर इन मांगों को लेकर आंदोलन चला रहे हैं। 2021 से केंद्र सरकार के साथ कई दौर की बातचीत कर चुके हैं।

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एलएबी के चेयरमैन ने क्या कहा? 
एलएबी के चेयरमैन चेरिंग दोरजे लकरूक ने कहा कि हालांकि ग्रुप एमएचए के साथ बैठक का स्वागत करता है, लेकिन वह बातचीत के नतीजों के आधार पर ही इसका आकलन करेगा। उन्होंने कहा, 'अगर बैठक का नतीजा सकारात्मक रहता है। इन मुद्दों पर रचनात्मक और नतीजे देने वाली बातचीत होती है, तो हम इसका स्वागत करेंगे। वरना, हम अपना आंदोलन और तेज कर देंगे।'

लाक्रुक ने किस बात पर चिंता जताई? 
इसके साथ ही लाक्रुक ने पिछले साल 24 सितंबर की उन घटनाओं की जांच के लिए बनाए गए जांच आयोग की रिपोर्ट में देरी पर भी निराशा जताई, जिनमें चार लोगों की जान चली गई थी। उन्होंने 24 सितंबर की हिंसा के सिलसिले में जिन लोगों पर केस दर्ज किए गए थे, उनके मामलों के अभी तक लंबित रहने पर भी सवाल उठाए।
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लाक्रुक ने क्या आरोप लगाया? 
दिल्ली में 20 जुलाई की जंतर-मंतर घटना से जुड़े केस वापस लेने के कदम का स्वागत करते हुए, उन्होंने लद्दाख के मामले में केंद्र पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया। लक्रुक के अनुसार, पिछले साल हुई हिंसा से जुड़े 80 मामलों में से अब तक सिर्फ 25 मामले ही वापस लिए गए हैं। उन्होंने कहा, 'हम सभी भारतीय हैं। सभी के साथ समान व्यवहार होना चाहिए। लद्दाख के लोगों की जान इतनी सस्ती नहीं है।'

सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने क्या कहा? 
इस बीच, सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने कहा कि एलएबी पिछले साल मारे गए, घायल हुए और जेल गए लोगों की याद में सितंबर को शहीद माह के तौर पर मना रहा है। वांगचुक ने कहा कि कई कार्यक्रम तय किए गए थे, लेकिन कारगिल से लेह तक की प्रस्तावित पदयात्रा, जो 10 सितंबर को शुरू होने वाली थी, उसे एमएचए के साथ एक दिन पहले होने वाली बातचीत को देखते हुए टाल दिया गया है।

उन्होंने कहा कि अगर 9 सितंबर की बातचीत से कोई संतोषजनक नतीजा नहीं निकलता है, तो मार्च को फिर से शुरू किया जा सकता है। अगर ऐसी स्थिति बनती है, तो मार्च 24 सितंबर से लगभग पांच दिन पहले आयोजित किया जाएगा।

वांगचुक ने कहा, 'हम एक बार फिर पूरे भारत के लोगों से अपील करेंगे कि वे लद्दाख के समर्थन में, पर्यावरण के समर्थन में और देश की सीमाओं पर डटे लद्दाख के लोगों के समर्थन में आगे आएं।' उन्होंने कहा कि एपेक्स बॉडी को उम्मीद है कि सरकार 9 सितंबर की बैठक में प्रस्तावित लद्दाख विधानसभा पर एक विस्तृत ड्राफ्ट पेश करेगी, जिसमें उसकी शक्तियों और अधिकारों का भी जिक्र होगा।

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