अमित मालवीय ने कांग्रेस नेता जयराम रमेश के पोस्ट पर जवाब देते हुए लिखा कि 'प्रतिक्रिया देने से पहले पढ़ना हमेशा अच्छा होता है। आपने जिन दस्तावेजों का हवाला दिया है, उनमें लिखा है कि 'अभियोग में लगाए गए आरोप, तब तक आरोपी ही रहते हैं, जब तक वे साबित न हो जाएं।
अमेरिकी अभियोजकों द्वारा भारतीय अरबपति गौतम अदाणी और उनकी कंपनियों से जुड़े लोगों पर लगाए गए आरोपों के बाद देश की राजनीति गरमा गई है। कांग्रेस ने सरकार पर गौतम अदाणी को बचाने का आरोप लगाया और साथ ही मामले की जांच जेपीसी से कराने की मांग की है। वहीं भाजपा ने कांग्रेस के आरोपों पर पलटवार करते हुए उन्हें अति-उत्साह से बचने की सलाह दी है।
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भाजपा ने दिया करारा जवाब
भाजपा नेता अमित मालवीय ने कांग्रेस के आरोपों पर करारा जवाब देते हुए सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा किया। इस पोस्ट में अमित मालवीय ने कांग्रेस नेता जयराम रमेश के पोस्ट पर जवाब देते हुए लिखा कि प्रतिक्रिया देने से पहले पढ़ना हमेशा अच्छा होता है। आपने जिन दस्तावेजों का हवाला दिया है, उनमें लिखा है कि 'अभियोग में लगाए गए आरोप, तब तक आरोपी ही रहते हैं, जब तक वे साबित न हो जाएं। आरोपों के साबित होने तक प्रतिवेदी को निर्दोष माना जाता है।'
इसके बाद भाजपा नेता ने अदाणी पर लगे आरोपों का बचाव करते हुए लिखा कि 'आरोप का सार ये है कि अमेरिकी अक्षय ऊर्जा कंपनी एज्योर पावर और भारतीय कंपनी अदाणी ग्रीन एनर्जी ने सोलर एनर्जी कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (SECI) के साथ 12 गीगावाट बिजली की आपूर्ति करने का समझौता किया। इस समझौते के तहत एज्योर पावर को 4 गीगावाट और अदाणी ग्रीन एनर्जी को 8 गीगावाट का आवंटन किया गया था। सोलर एनर्जी कॉर्पोरेशन का राज्य बिजली वितरण कंपनियों (SDC) के साथ समझौता था। चूंकि बिजली महंगी थी, इसलिए राज्य बिजली वितरण कंपनियां बिजली खरीदने को तैयार नहीं थे। इसलिए, अदाणी ने (एक अमेरिकी फर्म एज़्योर पावर के साथ मिलीभगत करके) जुलाई 2021 से फरवरी 2022 के बीच ओडिशा (बीजद शासित), तमिलनाडु (डीएमके शासित), छत्तीसगढ़ (कांग्रेस) और आंध्र प्रदेश (वाईएसआरसीपी शासित) में वितरण कंपनियों को करीब 26 करोड़ डॉलर का भुगतान किया।'
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भाजपा नेता ने कांग्रेस को अतिउत्साह से बचने की दी सलाह
मालवीय ने कांग्रेस को घेरते हुए लिखा कि 'यहां जिन राज्यों की बात की गई है, वे सभी उस समय विपक्षी कांग्रेस या उसके सहयोगियों द्वारा शासित थे। इसलिए कांग्रेस को उपदेश देना बंद करना चाहिए और कांग्रेस और इसके सहयोगियों को मिली रिश्वत की जानकारी देनी चाहिए। इसके अलावा, कोई भारतीय अदालत भी वैध आधार पर अमेरिकी फर्म पर बाजार तक पहुंच बनाने के लिए अमेरिकी अधिकारियों को रिश्वत देने का आरोप लगा सकती है। तो फिर क्या हमें तब कानून को अपना काम करने देना चाहिए और संबंधित कॉर्पोरेट को किसी विदेशी देश की घरेलू राजनीति में शामिल होने देना चाहिए?' भाजपा नेता ने लिखा कि 'बेवजह उत्साहित न हों। संसद सत्र और डोनाल्ड ट्रम्प के राष्ट्रपति पद से ठीक पहले ये कार्रवाई होना कई सवाल खड़े करता है। कांग्रेस को जॉर्ज सोरोस और उनके गुटों के हाथों की कठपुतली नहीं बनना चाहिए।'