पहले इस कमांडो फोर्स का नाम 'टाइगर फोर्स' रखा गया था लेकिन बाद में इसे बदलकर 'गरुड़ कमांडो फोर्स' कर दिया गया। शनिवार को पठानकोट एयरफोर्स स्टेशन पर हुए आतंकी हमले में इन्होंने अपनी जांबाजी का नमूना दिखाया और महज कुछ घंटों में चार आतंकियों को मार गिराया।
गरुड़ कमांडो भारतीय वायु सेना के एक स्पेशल फोर्स का नाम है जिसमें में कुछ चुनिंदा लोगों को कड़ी ट्रेनिंग के बाद शामिल किया जाता है। गरुड़ कमांडो की ट्रेनिंग देश में पहले से ही मौजूद दूसरे स्पेशल फोर्सेज के जैसे दी जाती है जिसमें पैरा कमांडो और मार्कोज कमांडो फोर्स के नाम शामिल हैं।
ये वायु सेना पुलिस की तरह तकनीकी संस्थानों की सुरक्षा नहीं करते बल्कि वायु सेना के अहम अभियानों में यह अहम भूमिका निभाते हैं। गरुड़ कमांडो की शुरुआती ट्रेनिंग 72 हफ्तों की होती है। इसका मतलब करीब डेढ़ साल तक। लेकिन इनकी पूरी ट्रेनिंग खत्म होने में करीब तीन साल का लंबा वक्त लगता है।
गरुड़ कमांडो की ट्रेनिंग के दौरान इन्हें आतंकवादियों से निपटने के अलावा तरह की ट्रेनिंग दी जाती है। शुरुआत के पहले तीन महीनों की ट्रेनिंग के दौरान उन लोगों को छांट कर बाहर निकाल दिया जाता है जो पहले से निर्धारित मानकों पर खरे नहीं उतरते या फिर उनकी क्षमता जवाब दे जाती है।
दूर दराज के इलाकों में आसानी से पहुंचने के लिए इन्हें पैरा जंपिंग की भी ट्रेनिंग दी जाती है। इतने ऊंचाई कूदते समय इन्हें थोड़ा भी डर नहीं लगता। संयुक्त राष्ट्र शांति सेना का हिस्सा होने की वजह से गरुड़ कमांडो केवल देश की सुरक्षा ही नहीं करते बल्कि ये दुनिया के दूर दराज इलाकों में जाकर संकट में फंसे लोगों की मदद भी करते हैं।