गंगा जल संधि पर 86वीं बैठक के लिए भारत आएगी 11 सदस्यीय बांग्लादेशी टीम
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गंगा जल संधि के संबंध में बैठक के लिए 11 सदस्यीय बांग्लादेशी प्रतिनिधिमंडल सोमवार को भारत आएगा। दोनों देशों के तकनीकी विशेषज्ञों की संयुक्त समिति की 86वीं बैठक में 30 साल पुरानी संधि पर बातचीत होगी। दोनों देशों के बीच सीमापार नदी जल बंटवारे के लिए हुई गंगा जल संधि का नवीनीकरण 2026 में होना है। बांग्लादेश से प्रकाशित होने वाले समाचारपत्र ‘डेली स्टार’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक संयुक्त नदी आयोग (जेआरसी) के सदस्य मोहम्मद अबुल हुसैन के नेतृत्व में बांग्लादेशी प्रतिनिधिमंडल तीन मार्च को कोलकाता पहुंचेगा।
एक साल में दो बार होती है बैठक
कोलकाता पहुंचने के बाद बांग्लादेशी अधिकारी फरक्का में गंगा पर संयुक्त निरीक्षण स्थल के दो दिवसीय दौरे पर रवाना हो जाएंगे। वरिष्ठ संयुक्त आयुक्त (एफएम) आर आर संभारिया की तरफ से लिखे गए पत्र के मुताबिक, प्रतिनिधिमंडल 6-7 मार्च को भारत-बांग्लादेश संयुक्त नदी आयोग के तत्वावधान में दो दिवसीय बैठक के लिए कोलकाता लौटेगा। अबुल हुसैन ने बांग्लादेशी प्रतिनिधिमंडल के दौरे के संबंध में कहा, संयुक्त नदी आयोग सीमा पार नदी पर चर्चा करने के लिए वर्ष में एक बार बैठक करता है।
दोनों देशों के बीच 54 नदियों के जल का आदान-प्रदान
जल शक्ति मंत्रालय के अनुसार, भारत और बांग्लादेश 54 नदियों का पानी साझा करते हैं। भारत और बांग्लादेश के संयुक्त नदी आयोग का गठन 1972 में साझा अथवा सीमा अथवा सीमा पार नदियों पर आपसी हित के मुद्दों को हल करने के लिए द्विपक्षीय तंत्र के रूप में किया गया था।
पीएम देवेदौड़ा के कार्यकाल में हुआ था समझौता
बता दें कि करीब 30 साल पहले गंगा जल संधि पर 12 दिसंबर 1996 को तत्कालीन भारतीय प्रधानमंत्री एच.डी. देवेगौड़ा और उनकी बांग्लादेशी समकक्ष शेख हसीना ने हस्ताक्षर किए थे। पिछले साल जून में हसीना की भारत की यात्रा के दौरान दोनों पक्षों ने घोषणा की थी कि 1996 की संधि के नवीनीकरण के लिए तकनीकी वार्ता शुरू हो गई है। हालांकि, अगस्त 2024 में हसीना की सरकार गिर गई थी।
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