गंगा नदी में अठखेलियां करती डॉल्फ़िन।
नमामि गंगे परियोजना के मुख्य स्तंभ
- सीवरेज उपचार अवसंरचनानदी-तट विकास
- नदी सतह की सफाई
- जैव विविधता
- वनीकरण
- जन जागरण
- औद्योगिक अपशिष्ट निगरानी
- गंगा ग्राम
अब तक कितना पैसा खर्च हुआ
केंद्र सरकार ने जब 2014-15 में नमामि गंगे परियोजना की शुरुआत की थी तो योजना के तहत मार्च 2021 तक 20 हजार करोड़ का बजट निर्धारित किया गया था। इस बजट से सीवेज प्लांट का निर्माण, गंगा की सफाई समेत तमाम कार्य कराए गए। इसके बाद 2021 में परियोजना के बजट में इजाफा किया गया। इसका दोबारा बजट 22500 करोड़ रुपये तय किया गया। अब इस योजना को 2026 तक बढ़ा दिया गया है। परियोजना के तहत 2022 तक सबसे ज्यादा बजट 4205 करोड़ रुपये उत्तर प्रदेश को मिला। जबकि बिहार को 3516 करोड़, पश्चिम बंगाल को 1320 करोड़, उत्तराखंड को 1117 करोड़ रुपये दिए गए।
कितनी साफ हुई गंगा
सरकार का दावा है कि नमामि गंगे परियोजना के तहत गंगा नदी में पहले से काफी साफ हुई है। जलशक्ति मंत्रालय की एक रिपोर्ट के मुताबिक 2018 से 2021 तक नदी के पानी की स्थिति में अंतर आया है। नदी की सबसे प्रदूषित धारा उत्तर प्रदेश के कन्नौज से वाराणसी तक के बीच पानी में ऑक्सीजन की मांग (बीओडी) में कमी आई है। पहले यहां बीओडी 6 से 10 मिली ग्राम प्रति लीटर होता था। इसके अलावा साल 2022 में 13.73 टीडीपी बीओडी भार में कमी आई है।
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