Ganga Samvad Yatra: गंगा संवाद यात्रा
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गंगा में प्रदूषण पर जन जागरूकता पैदा करने के लिए केएन गोविंदाचार्य के नेतृत्व में ‘गंगा संवाद यात्रा’ 11 अक्तूबर से चल रही है। इस यात्रा के राष्ट्रीय सह-संयोजक जगदीश ममगांई ने प्रधानमंत्री मोदी को पत्र लिखकर इस मुद्दे पर उनका ध्यान आकृष्ट कराया है। उन्होंने लिखा है कि इस देश के करोड़ों लोगों की प्राणदायिनी गंगा किन कारणों से प्रदूषित हो रही है और उसे इस प्रदूषण से बचाने के लिए क्या किया जा सकता है। ममगांई ने गंगा के महत्त्व को देखते हुए इस मुद्दे पर अविलंब कार्रवाई करने का सुझाव दिया है।
ममगांई ने कहा कि पवित्र गंगा की हिफाजत करना सभी का दायित्व है। गंगा में बढ़ रहे प्रदूषण के प्रति आमजन और स्थानीय तटवासी चिंतित हैं। राष्ट्रीय स्वाभिमान आंदोलन केंद्र से आग्रह करता है कि नदियों पर न्यूनतम पर्यावरणीय प्रभाव सुनिश्चित हो और सिंचाई-पेयजल के लिए नदी से निकालने वाले जल की सीमा निश्चित की जाए।
उन्होंने कहा है कि प्रधानमंत्री मोदी स्वयं गंगा के उपासक हैं और गंगा तट के क्षेत्र से सांसद निर्वाचित हुए हैं। उनसे देश व समाज को प्रदूषण मुक्त गंगा की अपेक्षा है। यह यात्रा समाज की भूमिका व सक्रिय सहभाग के लिए प्रोत्साहित करने के लिए भी है। उन्होंने कहा कि 79 वर्ष की आयु में गोविंदाचार्य गंगा तट पर लगभग 500 किमी की पदयात्रा कर रहे हैं। उनकी सेहत के प्रति सामाजिक कार्यकर्त्ता चिंतित हैं।
स्वामी निगमानंद जी, आईआईटी के प्रोफेसर रहे प्रसिद्ध पर्यावरणविद डॉ. जीडी अग्रवाल (जिन्हें स्वामी ज्ञान स्वरुप सानंद के नाम से भी जाना जाता है), सहित कई प्रसिद्ध संतों ने गंगा की दशा सुधारने के लिए बलिदान दिया है। कई बलिदानों के बावजूद गंगा की स्वच्छता और अविरलता का संघर्ष आज भी जरूरी है।
गंगा की निर्मलता और निरंतरता पर जनजागरण करने के लिए राष्ट्रीय स्वाभिमान आंदोलन की अगुवाई में केएन गोविंदाचार्य गंगा के तट पर यात्रा कर रहे हैं। बुलंदशहर के नरौरा से आरंभ हुई यात्रा अब तक संभल और बदायूं की लगभग 113 किमी की पदयात्रा कर चुकी है। इससे पूर्व वर्ष 2009 में भी वह गंगा सागर से गंगोत्री तक अध्ययन यात्रा कर चुके हैं।