राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के अहिंसक विरोध की उनकी सीख को आज भी पूरी दुनिया में सम्मान के साथ न केवल याद किया जाता है, बल्कि उसका व्यापक रूप से पालन भी किया जाता है। दक्षिण अफ्रीका में भारतीयों के अधिकारों के लिए संघर्ष के दौरान स्व शुद्धिकरण और सत्याग्रह से शुरू उनके प्रयोग ने दुनिया को अहिंसक विरोध के रूप में प्रतिरोध का सबसे शक्तिशाली और कारगर हथियार दे डाला।
गुजरात के काठियावाड़ के दीवान परिवार में जन्मे मोहनदास के महात्मा गांधी बन जाने की जीवनयात्रा बड़ी दिलचस्प है और प्रेरणादायी भी। पढ़ाई-लिखाई में औसत दुर्बल शरीर वाले बालक को 'सत्य के साथ प्रयोग' ने महामानव का आभामंडल दे दिया।
आइए एक नजर राष्ट्रपिता के 'मोहन से महात्मा' तक के सफर पर