भारत-चीन सीमा पर, दोनों देशों के सैनिकों के बीच 2020 में हुई झड़प को लेकर कांग्रेस पार्टी ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष मल्लिकार्जुल खरगे ने तीन साल पहले गलवां घाटी में अपना सर्वोच्च बलिदान देने वाले भारत के 20 वीर जवानों को कृतज्ञ राष्ट्र की ओर से भावभीनी श्रद्धांजलि देते हुए कहा, मोदी सरकार की नाकामियों के चलते एलएसी पर इन तीन सालों में पहले की तरह यथास्थिति अब नहीं है। हम 65 में से 26 पेट्रोलिंग प्वाइंट पर अपना अधिकार खो चुके हैं। खरगे की इस बात का सीधा मतलब है कि कांग्रेस अब 'गलवां' घाटी के सहारे मोदी सरकार को घेरने में जुटी है। चीन सीमा को लेकर खरगे ने तंज भरे लहजे में कहा, क्या अब 'लाल' आंख धुंधली हो गई हैं।
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देशवासियों को अंधेरे में रखना चाहती है मोदी सरकार
मल्लिकार्जुन खरगे ने अपने ट्वीट में लिखा, हमने संसद में ये मुद्दा कई बार उठाने की कोशिश की है, पर मोदी सरकार देशवासियों को अंधेरे में रखना चाहती है। गलवां पर पीएम मोदी की 'क्लीन चिट' की वजह से चीन अपने नापाक इरादों में सफल होता दिख रहा है। ये हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा और देश की अखंडता पर गहरा आघात है। मोदी सरकार की 'लाल आंख' धुंधली पड़ गई है, जिस पर उसने चीनी चश्मा पहन रखा है। विपक्ष में रहकर हमारा काम है, देश को चीनी विस्तारवादी नीति के खिलाफ एकजुट रखना और मोदी सरकार के चीनी चश्मे को उतार फेंकना। पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने अपने ट्वीट में कहा, गलवां घाटी के संघर्ष में शहीद हुए हमारे सभी वीर जवानों को उनके शहादत दिवस पर शत-शत नमन। देश की सीमा की रक्षा के लिए उनका दिया सर्वोच्च बलिदान भारत सदैव याद रखेगा। इसके बाद प्रियंका गांधी ने भी अपने ट्वीट में लिखा, देश की रक्षा करते हुए गलवां घाटी में शहीद हुए सभी वीर जवानों को नमन। हम वीर जवानों की शहादत कभी नहीं भूलेंगे और इस सर्वोच्च बलिदान के लिए हमेशा उनके ऋणी रहेंगे।
क्या है 65 में से 26 पेट्रोलिंग प्वाइंट्स पर अधिकार
चीन से लगती सीमा पर पेट्रोलिंग पॉइंट्स को लेकर कांग्रेस पार्टी ने गत फरवरी में केंद्र सरकार पर निशाना साधा था। पार्टी नेता पवन खेड़ा ने एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा था, भारत ने अब 65 पेट्रोलिंग प्वाइंट्स में से 26 पर अपना अधिकार खो दिया है। मई 2020 से पहले भारत सभी 65 पेट्रोलिंग प्वाइंट्स पर गश्त करता था। गलवां में मई 2020 के दौरान ही भारत के 20 बहादुरों ने अपने प्राणों की आहुति दी थी। पीएलए द्वारा सबसे ऊंची चोटियों पर अपने बेहतरीन कैमरों की मदद से भारतीय सेना पर नजर रखी जा रही है। बतौर पवन खेड़ा, मोदी सरकार की चीन को क्लीन चिट देश के हिस्से की 'सलामी स्लाइसिंग' करवाती है। चीन को पीएम मोदी की 'बेदाग क्लीन चिट' के झूठ का पर्दाफाश 'पुलिस मीट सिक्योरिटी रिसर्च पेपर' की कड़वी सच्चाई ने कर दिया है। मोदी सरकार द्वारा चीन के अवैध कब्जे और सैन्य निर्माण से लगातार इनकार ने चीन का हौसला बढ़ाया है। खेड़ा ने मोदी सरकार पर भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा व भूभागीय अखंडता से समझौता करने का आरोप लगाया है।
डीजीपी-आईजीपी सम्मेलन में हुआ था खुलासा
दिल्ली में इस वर्ष आयोजित तीन दिवसीय वार्षिक डीजीपी-आईजीपी सम्मेलन में पीएम मोदी, गृह मंत्री, अमित शाह और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने भाग लिया था। बतौर खेड़ा, उस सम्मेलन में चर्चा के लिए प्रस्तुत एक विस्तृत सिक्योरिटी रिसर्च पेपर में भारत के क्षेत्र पर चीन के अवैध कब्जे के प्रति मोदी सरकार की स्तब्ध कर देने वाली उदासीनता के बारे में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए थे। रिसर्च पेपर में हुए कई खुलासे हुए थे। भारत ने अब 65 पेट्रोलिंग प्वाइंट्स में से 26 पेट्रोलिंग प्वाइंट्स पर अपना अधिकार खो दिया है। मई 2020 से पहले भारत सभी 65 पेट्रोलिंग प्वाइंट्स पर पेट्रोलिंग करता था। पेपर में कहा गया, वर्तमान में, काराकोरम दर्रे से लेकर चुमुर तक 65 पेट्रोलिंग प्वाइंट्स हैं, जिन्हें आईएसएफ (भारतीय सुरक्षा बल) द्वारा नियमित रूप से गश्त किया जाना है। 65 पीपी में से, 26 पीपी (यानी पीपी नंबर 5-17, 24-32, 37, 51, 52, 62) में हमारी उपस्थिति प्रतिबंधात्मक या आईएसएफ (भारतीय सुरक्षा बलों) द्वारा गश्त नहीं करने के कारण खो गई है। बाद में चीन, भारत को यह तथ्य स्वीकार करने के लिए मजबूर करता है कि इन क्षेत्रों में लंबे समय से आईएसएफ या नागरिकों की उपस्थिति नहीं देखी गई है। उन क्षेत्रों में चीनी मौजूद थे। इससे भारतीय सीमा की ओर आईएसएफ के नियंत्रण वाले सीमा क्षेत्र में बदलाव होता है। ऐसे सभी पॉकेट को बफर जोन बना दिया जाता है, जिससे भारत इन क्षेत्रों पर नियंत्रण खो देता है। इंच दर इंच जमीन हड़पने की पीएलए की इस चाल को 'सलामी स्लाइसिंग' के नाम से जाना जाता है।