देश ने कोरोना के खिलाफ जिस लड़ाई की शुरुआत मार्च के महीने में की थी वो अब कमजोर पड़ती दिखाई दे रही है, क्योंकि चार चरणों के लॉकडाउन के खुलने के बाद से देश में कोरोना के मामलों में लगातार बढ़ोतरी जारी है। देखते ही देखते भारत आज कोरोना संक्रमण के मामले में टॉप-पांच देशों में शामिल हो गया है।
लगातार बढ़ रहे मामलों ने राज्य सरकारों की भी चिंताएं बढ़ा दी है और वे अब लॉकडाउन को बढ़ाने के पक्ष में हैं। कोविड-19 के बढ़ते खतरे को देखते हुए ही एक जन स्वास्थ्य देखभाल विशेषज्ञ ने बुधवार को कहा कि लॉकडाउन अवधि से मिला लाभ संभवत: अनलॉक से खत्म हो गया। उन्होंने साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में आबादी की रक्षा करने का आह्वान किया जो संक्रमण के मामलों में बढ़ोतरी की संभावित स्थिति को लेकर तैयार नहीं हैं।
इंडियन इंस्टीट्यूट आफ पब्लिक हेल्थ, पब्लिक हेल्थ फाउंडेशन आफ इंडिया के प्रोफेसर वी रमण धर ने कहा कि अनलॉक होने से अनुशासन का पालन नहीं करने की पुरानी बुरी आदतें वापस आ गई हैं। ये बुरी आदतें एक-दूसरे से दूरी नहीं बनाने और ठीक तरह से मास्क का इस्तेमाल नहीं करने को लेकर हैं।
रमण धर ने कहा, ‘ग्रामीण क्षेत्रों में प्रवासी मज़दूरों को उनके घरों के करीब पृथक किया जाना चाहिए। दुर्भाग्य से, वहाँ मामलों की बढोतरी होने की स्थिति के लिए जांच और चिकित्सा देखभाल की पर्याप्त सुविधा नहीं है।’
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि बुधवार सुबह आठ बजे तक 24 घंटे की अवधि में कोविड-19 से 279 लोगों की मौत हुई जिससे मरने वालों की संख्या बढ़कर 7,745 जबकि 9,985 नए मामले सामने आने से देश में कुल मामले बढ़कर 2,76,583 हो गए।
यह पूछे जाने पर कि भारत किस तरह से होने वाली मौतों की दर को नीचे रख सकता है, उन्होंने कहा कि संक्रमितों के सम्पर्क में आए लोगों का पता लगाकर, संक्रमितों को पृथक करके, संक्रमित व्यक्ति के सम्पर्क में आए लोगों को पृथक करके और गंभीर रूप से प्रभावित मरीजों की देखभाल के लिए अस्पतालों को तैयार रखकर ही ऐसा किया जा सकता है।