देश में होने वाले जी 20 सम्मेलन में साइबर सुरक्षा बड़ा मसला रहेगा। पिछले माह अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), दिल्ली में हुए साइबर अटैक के बाद चिकित्सा सुविधा बुरी तरह से प्रभावित हुई। इसका शिकार देश-दुनिया के अन्य अस्पताल भी हो सकते हैं, जिसका खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ता है।
भविष्य में फिर से ऐसा ना हो इसे लेकर जी-20 में शामिल देशों के साथ मिलकर व्यापक स्तर पर रणनीति बनेगी। शुक्रवार को कांस्टीट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया में जी- 20 में भारत के लिए वैश्विक स्वास्थ्य नेतृत्व के अवसर विषय पर आयोजित हुई बैठक में डॉक्टरों ने अपना पक्ष रखा। एकीकृत स्वास्थ्य और कल्याण (आईएचडब्ल्यू) परिषद द्वारा आयोजित सामरिक गोलमेज सम्मेलन में डॉ. करण ठाकुर ने कहा कि एम्स में जो हुआ वह सोची समझी साजिश थी। यह देश के अन्य अस्पतालों में भी हो सकता है। साइबर सुरक्षा के लिए जी 20 देशों के सहयोग से बड़े स्तर पर काम किया जा सकता है।
फार्मा कंपनी में भारत आगे
रिसर्च सोसाइटी फॉर द स्टडी ऑफ़ डायबिटीज इन इंडिया के अध्यक्ष डॉ. बीएम मक्कर ने कहा कि मधुमेह की दवाइयों के क्षेत्र में भारत तेजी से आगे बढ़ रहा है। जी 20 में भारतीय फार्मा कंपनियों को एक जगह मिलेगी। भारतीय दवा कंपनी विश्व मानक स्तर की दवाइयां तैयार कर रही है जिसकी मांग तेजी से बढ़ रही है।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता से बेहतर होगी व्यवस्था
लोकनायक अस्पताल के निदेशक डॉ. सुरेश कुमार ने कहा कि कोरोना महामारी में कृत्रिम बुद्धिमता काफी मददगार साबित हुई थी।